कस्टडी से फरार हुए आर्म्स एक्ट के आरोपी को गंगनहर कोतवाली पुलिस गिरफ्तार करने का दम भरती रही और उसने चकमा देकर चोरी के मामले में जमानत तुड़वाकर लक्सर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इससे पहले प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की सुपारी के मामले में फरार चल रहे आरोपी ने भी बुर्का पहनकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। तब भी गंगनहर कोतवाली पुलिस की खूब फजीहत हुई थी।
कहावत है कि सुई भी गिरती है तो पुलिस को भनक लग जाती है, लेकिन गंगनहर कोतवाली पुलिस को 25 जुलाई को कस्टडी से फरार हुए आर्म्स एक्ट के आरोपी तेलीवाला निवासी रईस के सरेंडर की भनक तक नहीं लगी। पुलिस लगातार दावा कर रही थी कि जल्द उसको गिरफ्तार किया जाएगा। उसके परिजनों और रिश्तेदारों पर पूरी नजर है, लेकिन पुलिस के दावों की तब हवा निकल गई, जब आरोपी ने लक्सर जीआरपी में दर्ज चोरी के एक मामले में जमानत तुड़वाई और लक्सर कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
इससे पहले पाड़ली गुर्जर निवासी प्रॉपर्टी डीलर की सुपारी के मामले में फरार चल रहे आरोपी अमजद की गिरफ्तारी के लिए गंगनहर पुलिस ने तमाम दावे किए थे, लेकिन 21 जुलाई को वह कोर्ट में सरेंडर करने आ रहा है, इतनी बड़ी सूचना पुलिस के पास नहीं थी। पुलिस ने कोर्ट परिसर से लेकर बाहर तक जाल बिछा रखा था, लेकिन यहां भी वह गच्चा खा गई। आरोपी ने बुर्का पहनकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रह गई।
आखिर जिम्मेदार कौन?
कोतवाली या थाना परिसर में अगर कोई घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी इंस्पेक्टर या थानाध्यक्ष की होती है। कोतवाली में पुलिस अभिरक्षा से मुजरिम फरार होना बड़े अपराध की श्रेणी में आता है। अक्सर देखा जाता है कि कार्रवाई इंस्पेक्टर पर होती है, लेकिन गंगनहर कोतवाली में पुलिस अभिरक्षा से आरोपी के फरार होने के बाद अभी यह तय नहीं हो पाया है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?