अदालत में सुनवाई के दौरान कई बार तीन अज्ञात बलात्कारियों का जिक्र हुआ। पीड़िता ने अदालत में कहा कि तीन अन्य अज्ञात लोगों ने भी उसके साथ बलात्कार किया था।
लेकिन इन तीन अज्ञात व्यक्तियों को पुलिस न तो गिरफ्तार कर पाई है न ही विवेचना हुई। अभियोजन पक्ष भी इन अज्ञात लोगों के संबंध में न्यायालय में कोई सूचना प्रस्तुत नहीं कर पाया।
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हट सकता है अज्ञात चेहरों से नकाब
हालांकि, अधिवक्ताओं का मानना है कि इन अज्ञात लोगों के चेहरों से अब भी नकाब हट सकता है। बार एसोसिएशन दून के अधिवक्ताओं की मानें तो पुलिस पूरे प्रकरण में जबरदस्त दबाव के चलते विवेचना नहीं कर पाई है।
तीनों अज्ञात बलात्कारियों को बचाने की कोशिश हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी बताते हैं कि हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस ने ठीक से विवेचना नहीं की।
पुलिस चाहे तो इस मामले में अलग से चार्जशीट दाखिल कर सकती है। वरिष्ठ अधिवक्ता केके गोयल के मुताबिक हाईकोर्ट में रिट लगाई जाए तो तीनों अज्ञात बलात्कारियों के चेहरे से पर्दा उठ सकता है।
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दिखा दबाव का असर
इस मामले में नेताओं के नाम सामने आने के कारण पुलिस शुरू से ही दबाव में रही। दबाव का असर विवेचना में भी नजर आया। युवती का आरोप था कि उसकी अश्लील फिल्म बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया। लेकिन पुलिस कैमरा बरामद नहीं कर पाई है और न ही आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया।
चित्रों से बयां किया दर्द
गैंग रेप पीड़िता ने अपनी ड्राइंग बुक में चित्रों के जरिये अपना दर्द उकेरा है। ड्राइंग बुक में आरोपियों के स्केच के अलावा बलात्कार से लेकर कोर्ट के बाहर कुछ लोगों द्वारा उन्हें दौड़ाए जाने की घटना को पीड़िता ने चित्रों के माध्यम से दर्शाया है।
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पेंसिल से बने चित्र बताते हैं कि कैसे आरोपियों ने कमरे में बैठकर पहले शराब पी और फिर एक-एक कर उसके साथ बलात्कार किया।