राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के क्षेत्र में पहुंचने से घीड़ी गांव में ग्रामीणों की आराध्य देवी बालकुंवारी के दरबार में हुए वार्षिक पूजन में इस बार माहौल काफी बदला दिखा।
डोभाल के सपरिवार पहुंचने से लोग काफी उत्साहित दिखे। क्षेत्रवासियों को स्थानीय विकास को लेकर काफी उम्मीदें हैं।
बालकुंवारी मंदिर में 1999 से हर साल वार्षिक पूजन और भंडारा आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले 1999 में अजीत डोभाल इस वार्षिक पूजन में शरीक हुए थे। 99 के बाद इस बार यह दूसरा मौका है जब वे सपरिवार वार्षिक पूजन में पहुंचे।
पैतृक घर नहीं देख पाए डोभाल
उनके कार्यक्रम में आने से घीड़ी गांव के लोग ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न स्थानों में रह रहे घीड़ी गांव के प्रवासी लोग भी पहुंचे।
लोगों में अजीत डोभाल के इस दौरे से उनके क्षेत्र की समस्याओं का समाधान होने की उम्मींदें भी थीं। उनका कहना था राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के क्षेत्र में लगे इस दौरे से स्थितियां में बदलाव आने की उम्मीद है।
अजीत डोभाल का पैतृक गांव होने के नाते अधिकारियों का ध्यान इस क्षेत्र की समस्याओं की ओर जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद पहली बार गांव के मंदिर में पहुंचे अजीत डोभाल अपने पैतृक गांव घीड़ी जाने का समय नहीं निकाल पाए। गांव से कोई 300 मीटर ऊपर स्थित बाल कुंवारी मंदिर में पूजा अर्चना करने और लोगों से मिलने के बाद वे दिल्ली के लिए लौट गए।
डोभाल की मुरीद हुई नई पीढ़ी
प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल नई पीढ़ी के बच्चों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बने रहे। मन में अजीत डोभाल जैसा बनने का दृढ़ संकल्प लिए बच्चे उनके आगे पीछे घूमते रहे।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद पहली बार गांव आने की सूचना मिलते ही नई पीढ़ी के बच्चे भी उनको देखने के लिए पहुंच गए।
रिश्ते में किसी के चाचा तो किसी के दादा अजीत डोभाल बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। मन में अजीत डोभाल जैसा बनने का दृढ़ संकल्प लिए कई बच्चे काफी दूर-दूर के गांवों से पहुंचे हुए थे।
दूर दराज के गांव से पहुंचे अमित सिंह, अजय सिंह, जितेंद्र, मोनिका, दिक्षा, आदि ने उनको अपना आदर्श माना। कहा कि कोई भी माटी का लाल अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बूते कुछ भी कर सकता है।
गांववालों ने की जमकर प्रशंसा
अजीत डोभाल के यहां आने से सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उनका यहां आना क्षेत्र के लिए काफी लाभदायक साबित होगा।
-संजय बड़ोनी निवासी घीड़ी गांव
इससे क्षेत्र के विकास और व्यवस्थाओं में काफी असर पड़ेगा। विकास बढ़ने की भी उम्मीद हैं।
-बसंत रावत, निवासी धनाऊ
बड़े ओहदे में पहुंचने के बाद अजीत डोभाल के यहां आने से लोग काफी उत्साहित हैं। युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। ’’
-भास्कर डोभाल, निवासी घीड़ी गांव
डोभाल के बड़े ओहदे पर पहुंचने और यहां आने क्षेत्र को बड़ी पहचान मिली है। इससे क्षेत्र को काफी फायदा होगा।
-सुरेंद्र सिंह नेगी, सेवानिवृत्त शिक्षक अठूड़ गांव
अजीत डोभाल के क्षेत्र में आने से विभागीय अधिकारियों का ध्यान यहां की समस्याओं की ओर जाएगा। समाधान होने की भी उम्मीद है।
-हुकुम सिंह बिष्ट क्षेत्रवासी
‘‘अजीत डोभाल मेरे चाचा और हमारे गांव के हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। बड़े बुजुर्ग बतातें हैं कि वे बचपन से ही काफी कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। मैं भी उनके जैसे बनने का प्रयास अवश्य करूंगा।’’
-शैलेश, घीड़ी गांव निवासी
‘‘मैं काफी दूर से अपने आदर्श को देखने आया हूँ। अजीत डोभाल पूरे जिले और राज्य की प्रतिभा हैं। मैं और मेरे सहपाठी यह जानकर बेहद चकित हैं कि पहाड़ को कोई व्यक्ति इतने बड़े ओहदे तक पहुंच सकता है।’’ -संदीप, बौंसरी गांव निवासी
‘‘अजीत डोभाल मेरे ताऊ हैं। ताऊ की मेहनत और लगन को मेरा नमन है। कोई भी व्यक्ति कड़ी मेहनत और सच्ची लगन के बूते ही इतना बड़े पद का हकदार होता है। मेरी कोशिश भी उनके आदर्शों पर खरा उतरने की है।’’
-राखी, घीड़ी गांव निवासी
‘‘वे मेरे दादाजी हैं। अपने बुजुर्ग को इतने बड़े पद पर देखकर गर्व होता है। साथ ही उनका मृदु भाषी उनके पद पर चार चांद लगाता है। मैं उनके जैसे बनने की कोशिश तो कर ही सकता हूँ।’’
-सुमित कुकरेती, घीड़ी गांव निवासी