उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाना अस्थायी उपाय था और राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा को बहाल किया जा सकता था।
केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने यह बात उच्च न्यायालय द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन रद करने के एक दिन बाद शुक्रवार को कही। नायडू ने कहा कि केंद्र सरकार का स्पष्ट मानना है कि उत्तराखंड में संवैधानिक संकट था क्योंकि विधानसभा में विनियोग विधेयक पारित नहीं किया गया।
संसदीय मामलों के मंत्री नायडू ने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुच्छेद 356 के अलावा कोई रास्ता नहीं था। विधानसभा को भंग नहीं किया गया क्योंकि संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। वहां अस्थायी रूप से राष्ट्रपति शासन लगाया गया और किसी भी वक्त विधानसभा को बहाल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि जहां तक हमारी बात है तो हम हमेशा कानून और संविधान का सम्मान करते हैं।