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भूकंप रोधी घर नहीं बनाएंगे तो इन बड़ी सुविधाओं से रह जाएंगे महरूम

Fri, 03 Mar 2017 08:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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भूकंपरोधी मकान - फोटो : demo pic
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भविष्य में बनाये जाने वाले जो भवन भूकंप रोधी नहीं होंगे, वे बिजली और पानी के कनेक्शन से महरूम हो सकते हैं। इसका एक प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। भूकंपीय संवेदनशीलता के मद्देनजर गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने ये सिफारिश की है।
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समिति ने प्रदेश के विनियमित क्षेत्रों में बिल्डिंग बॉयलाज को बेहद सख्ती के साथ लागू करने पर जोर दिया है। इसके लिए समिति ने कई और निर्णय लिए हैं, जिन्हें चरणबद्ध ढंग से लागू करने की सिफारिश की गई है।

बता दें कि भूगर्भीय हलचलों के लिहाज से उत्तराखंड बेहद संवेदनशील है। पूरा प्रदेश जोन चार व पांच के अंतर्गत है। राज्य के लोग उत्तरकाशी और चमोली के भूकंप की त्रासदी के गवाह रह चुके हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों से राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग भूकंप के खतरों से निपटने के उपाय तलाश रहा है। 
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सरकारी सिस्टम को चौकस करने के साथ उसके सामने भवनों की मजबूती सबसे बड़ी चुनौती है। यहां भवन निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक इस्तेमाल नहीं हो रही है। बेशक नये  बॉयलाज बन गए हैं। राज्य में विनियमित क्षेत्रों में इन्हें लागू करने वाली एमडीडीए व एचडीए सरीखी संस्थाएं भी हैं। इसके बावजूद भवनों के निर्माण में भूकंप की संवेदनशीलता पूरी तरह से नजरांदाज हो रही
है।

राज्यस्तर पर गठित बिल्डिंग बॉयलाज कमेटी भवन निर्माण से जुड़ी नियामक एजेंसियों पर दबाव बना रही है। इसके लिये बिल्डिंग बॉयलाज समिति की बैठक में अहम निर्णय लिये गए। चर्चा के दौरान समिति ने पाया कि नियामक एजेंसियों में कर्मचारियों की भारी

कमी हैं। जो कर्मचारी वहां तैनात हैं, वह पूरी तरह से दक्ष नहीं हैं। तीसरा और सबसे अहम कि मानकों को लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। 
 
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एजेंसियों में कर्मचारियों के खाली पदों को भरने के लिए भेजा प्रस्ताव

डेमो पिक
-समिति ने निर्णय किया कि भवन निर्माण नियामक एजेंसियों में कर्मचारियों के खाली पदों को भरने के लिए एक प्रस्ताव शासन के सामने रखा जाएगा।

-एजेंसियों में तैनात कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने के लिये उन्हें आईआईटी रूड़की और सीबीआरआई के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

-भविष्य में बनने वाले भवनों पर बिल्डिंग बॉयलाज कड़ाई से लागू होगा और जो भवन इसके बिना बनेंगे उन्हें बिजली और पानी का कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। ये सारे सुझाव नई सरकार में गठित मंत्रिमंडल की बैठक में रखे जाएंगे।

भूकंप के लिहाज से उत्तराखंड संवेदनशील है। इसलिए यहां भवन का निर्माण भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर होना चाहिए। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इस दिशा में प्रयास चल रहे हैं। नए बिल्डिंग बॉयलाज में इसका प्रावधान है। बॉयलाज पर कड़ाई से पालन हो, इसके एक समिति बनाई गई है, जिसने कुछ निर्णय लिये हैं।
- सी. रविशंकर, अपर सचिव, आपदा प्रबंधन
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