डॉ. वर्षा ने बताया कि गर्भवती महिला को रक्तश्राव हो रहा था। शिशु का वजन भी सामान्य से करीब डेढ़ किलो ज्यादा था। बाद में महिला को वार्ड में शिफ्ट किया गया। महिला की यह छठी संतान है। दंपती की पांच बेटियां हैं।
जिले में एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं
चंपावत जिले में छोटे-बड़े कुल 23 सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन जिला अस्पताल सहित किसी भी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। एक साल पूर्व जिला अस्पताल में गायनाकोलोजिस्ट थीं, लेकिन उन्हें प्रतिस्थानी के आए बगैर कार्यमुक्त कर दिया गया। और जिस गायनोकोलोजिस्ट को यहां भेजा गया था, वह यहां कभी आई नहीं। सीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि हर महीने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है।
जिला अस्पताल स्टाफ द्वारा मेरी पत्नी को हायर सेंटर रेफर करने के लिए कहा गया। हायर सेंटर जाने के लिए आपात सेवा 108 को कॉल किया जा रहा था। इस बीच, हायर सेंटर भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही थी कि पत्नी को तेज दर्द हुआ। अस्पताल परिसर के पर्ची काउंटर के पास पत्नी एक कोने में गई, तभी उसने बेटे को जन्म दिया।
-दिनेश राम, प्रसूता का पति