आयोग के पास न आ सकें तो प्रधान के पास जाएं
राज्य महिला आयोग का मानना है कि कई बार रिश्तों की खटास में बातचीत मिठास का काम करती है और गृहस्थी उजड़ने से बच जाती है। यदि लोग आयोग के कार्यालय नहीं आ सकते, तो उनके पास काउंसलिंग के दूसरे विकल्प भी हैं। आयोग की ही सलाह है कि लोग चाहें तो अपने नजदीक में ग्राम प्रधान, जिले के सदस्य, पारिवारिक मामलों के वकील, एनजीओ पदाधिकारी के साथ भी आपसी सामंजस्य से विवाह पूर्व काउंसिलिंग करवा सकते हैं।
महिला आयोग कई मंचों से लोगों को जागरूक कर रहा है कि विवाह पूर्व काउंसलिंग करवाएं। इससे युवा पीढ़ी को उचित मार्गदर्शन मिलेगा। हिंसा और मानसिक उत्पीड़न के मामलों में कमी आएगी। आर्थिक मोर्चे पर सामंजस्य रहेगा और आमने-सामने बैठने से धोखाधड़ी की आशंका भी कम रहती है। वैवाहिक संबंध में युवक और युवती की समझ विकसित होती है। -कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग
इस साल आयोग में आईं शिकायतें
दहेज उत्पीड़न-51
शारीरिक उत्पीड़न-14
मानसिक उत्पीड़न-170
घरेलू हिंसा-116
भरण पोषण-11
2023-24 में दर्ज शिकायतें
दहेज उत्पीड़न-143
शारीरिक उत्पीड़न-32
मानसिक उत्पीड़न-545
घरेलू हिंसा-281
भरण पोषण-40
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2022-23 में दर्ज शिकायतें
दहेज उत्पीड़न-203
दहेज हत्या-तीन
शारीरिक उत्पीड़न-29
मानसिक उत्पीड़न-522
घरेलू हिंसा-289
भरण पोषण-34