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देखिए, संस्कारों वाले देश में हो रही अंतिम संस्कार की प्री-बुकिंग

Sat, 28 Nov 2015 07:21 PM IST
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून
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पश्चिमी देशों में मरने से पहले लोग इवेंट कंपनियों को अपने अंतिम संस्कार का पूरा कांट्रेक्ट इसलिए दे देते हैं क्योंकि वहां दफन के लिए जमीन पाने की क्यू काफी लंबी होती है और इसके लिए खर्च भी बहुत होता है। लेकिन भारत मे भी अब लोग अंतिम संस्कार के लिए पहले से इंतजाम करने लगे हैं। इनमें युवा भी शामिल हैं। कुछ इवेंट कंपनियों को दिल्ली, मुंबई, देहरादून और यूपी के लोगों ने इसकी जिम्मेदारी भी दी है।
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अपने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी देने वाले लोगों में यूपी, गुजरात और हरियाणा के लोग भी शामिल हैं, जिनमें दिल्ली के 4, मुंबई के 3 और देहरादून के 8 लोग इवेंट कंपनियों के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

अपने अंतिम संस्कार का ठेका देने वाले अधिकांश लोग कारोबारी तबके से हैं। संपर्क करने वालों में 30-35 वर्ष के युवा भी शामिल हैं। इवेंट कंपनियों ने इनके तीन समूह बनाए हैं, जिनमें 40-45 और 50-60 वर्ष के लोग भी शामिल हैं।
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भारत में 30-35 तक अविवाहित रह जाते हैं युवा

युवाओं द्वारा बुकिंग का कारण उनका अविवाहित रहने का संकल्प माना जा रहा है जबकि दूसरे समूह के लोगों को अपने बच्चों पर भरोसा नहीं है कि वे उनका सही ढंग से संस्कार करेंगे। इस समूह के 50 फीसदी ऐसे लोग भी हैं जिनके कोई औलाद नहीं है। ये सभी कारण बड़े सामाजिक बदलाव के संकेत हैं।

अंतिम संस्कार के डेमो की मांग बढ़ी
कहां हवन होगा, कहां श्रद्धांजलि दी जाएगी जैसी व्यवस्थाओं के डैमो पहले ही देखकर कंपनी को भुगतान हो रहा है। सभी व्यवस्थाओं के डेमो देखे जा रहे हैं। इवेंट कंपनियों ने इसके लिए कई डेमो तैयार कर लिए हैं। पैसे वाले लोग इस काम के लिए बड़ी रकम खर्च करने में भी पीछे नहीं हैं।
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अंतिम संस्कार के लिए इंवेट मैनेजर कर रहे ये व्यवस्थाएं

घर से घाट तक की अंतिम यात्रा, जहां अंतिम संस्कार होना है, वहां बैठने की पूरी व्यवस्था, अस्थि विसर्जन के दिन घाट पर पूरी साज-सज्जा जो कि पसंदीदा फूलों से कराई जा रही है, 101 ब्राह्मणों से शांति पाठ, श्रद्धांजलि देने के लिए सही जगह पर फोटो, हवन की विशेष व्यवस्था आदि।

इनकी सुनिए
कुछ बड़े लोगों के अंतिम संस्कार खास तरह से ही किए गए हैं। अब तो लोग मरने से पहले हमें यह काम देने लगे हैं। लोग पहले ही डेथ सेरेमनी के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं, ताकि मरने के बाद उनका पैसा उनकी अंतिम यात्रा में खर्च किया जा सके। भारत में यह नया कांसेप्ट है लेकिन लोगों की इसमें दिलचस्पी है।
-राजीव मित्तल, निदेशक, इवेंट कंपनी सिन्मिट कम्युनिकेशंस
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