हिमानी ने कहा कि फिल्म के क्षेत्र में प्रवासी उत्तराखंडी निवेश कर सकते हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली फिल्मों का निर्माण हो सके। हमारी फिल्मों की भी देश-विदेश में पहचान हो इज्जत हो जो अन्य प्रदेशों की फिल्मों को मिली है। उत्तराखंड में भी काफी प्रतिभा है। बस उन्हें आगे बढ़ाने वाला चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह तो नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ी हैं। क्यों न हमारे राज्य में ही ऐसी कोई संस्था बनाई जाए, जो यहां की प्रतिभा को निखार सके। इससे राज्य की आर्थिक वृद्धि होने के साथ ही रोजगार भी मिलेगा।
उत्तराखंड की लोक कला संस्कृति समृद्ध है। पांडव नृत्य, जागर आदि पर कार्य हो। बाहर के लोग भी यहां की संस्कृति को जाने, समझे। उन्होंने कहा कि अन्य राज्याें की भांति हमारे राज्य का प्रतिनिधित्व क्षेत्रीय फिल्मों में कम होता है। इसके लिए सरकार के साथ ही बाहर गए प्रवासियों को भी आगे आना होगा।