करीब 16 निर्धन कन्याओं का विवाह किया
पौड़ी जिले के किनारतल्ला के विजय नंद शर्मा भारत सरकार में अपर भविष्य निधि आयुक्त पद से सेवानिवृत्त होने के बाद बड़े शहरों में सुविधायुक्त का जीवन जीने के की जगह अपने लोगों की मदद को चुना। वीएन शर्मा ने राज्य के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य शिक्षा और रोजगार की मुहिम में जुटे हैं। उन्होंने गांव को गोद लेकर कृषि, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कुटीर उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें संसाधन भी मुहैया कराए। करीब 16 निर्धन कन्याओं का विवाह किया।
ग्रामीण महिलाओं को सब्जी उत्पादन, अचार-जैम निर्माण, हस्तशिल्प, विपणन के लिए प्रेरित किया और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक पहुंचाने में सहयोग किया। यही नहीं बल्कि ईशा फाउंडेशन के साथ मिलकर 243 उत्तराखंड बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इसके अलावा रामनगर में स्वयं के संसाधनों से एक प्रशिक्षण केंद्र खोला है जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी निशुल्क कराई जाती है। साथ ही गढ़वाल-कुमाऊं मंडल के 80 विद्यालयों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ने के लिए कंप्यूटर भी उपलब्ध कराए।
उत्तराखंड की बोलियों को एआई के युग से जोड़ने का बीड़ा उठाया
टिहरी जिले के मलेथा के सच्चिदानंद सेमवाल ने कनाडा में 20 साल से भी अधिक समय से आईटी के क्षेत्र में एक बेहतर मुकाम हासिल किया लेकिन विदेश की धरती पर भी उन्हें कहीं न कहीं अपनी बोली-भाषा को लेकर एक पीड़ा थी कि आने वाली पीड़ी एआई की दुनिया की होगी। ऐसे में गढ़वाली-कुमाउंनी और जौनसारी बोली को आने वाली पीढ़ी आखिरी किससे और कैसे समझेगी तो उन्होंने उत्तराखंड की बोलियों को एआई के युग से जोड़ने का बीड़ा उठाया। सेमवाल ने भाषा डेटा कलेक्शन पोर्टल शुरू किया। इसमें उन्होंने उत्तराखंड के भाषा विशेषज्ञ, लोग गायक, साहित्यकार, इतिहासकार जोड़े। पोर्टल में करीब 10 लाख शब्द, वाक्य, कहावतें और कहानियां एकत्र किए जाएंगे।
कुमाऊं के टनकपुर के रहने वाले राज भट्ट का नाम लंदन में बड़े उद्योगपतियों में शामिल है। राज भट्ट का कारोबार एक ही नहीं बल्कि पांच देशों में फैला हुआ है। वे पहाड़ की मुश्किलों और चुनौतियों से वाकिफ है। वे हर साल पहाड़ आते हैं और किसी भी दूरस्थ गांव में जाकर वहां की शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में मदद करते हैं। राज भट्ट पूरे उत्तराखंड को अपना घर-गांव मानते हैं यही वजह है कि मदद के लिए उनके हाथ सीमित क्षेत्र तक ही नहीं पहुंचते।
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राज भट्ट तीन-चार वर्ष पूर्व उत्तरकाशी जिले के रवांई घाटी के कोटी गांव आए। गांव में प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के साथ सुविधाओं की कमी, चहारदीवारी नहीं पर वे मदद के लिए आगे आए। स्कूल को सुविधाएं ही नहीं दी बल्कि एक गांव का शिक्षक भी तैनात किया। यही वजह है कि आज स्कूल स्मार्ट होने के कारण वहां छात्र संख्या भी बढ़ी है। गांव के ही नहीं क्षेत्र के लोग भी वहां अब अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। इसके अलावा राज भट्ट ने राजकीय इंटर कॉलेज, बुंदियाड़ के मेधावी बच्चों को गोद लिया। चिकित्सा, इंजीनियरिंग या फिर अन्य किसी भी क्षेत्र में जो भी छात्र जाना चाहता है, राज उन्हें आर्थिक रूप से मदद करते हैं।