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संसद के आध्यात्मीकरण का करेंगे प्रयास: पंड्या

Thu, 05 May 2016 02:21 AM IST
राजेश शर्मा/अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • कहा, शांतिकुंज का नारा ‘हम बदलेंगे युग बदलेगा’ संसद में भी साकार करने का करेंगे प्रयास
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डॉ. प्रणव पंड्या - फोटो : अमरउजाला
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विस्तार
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शांतिकुंज के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि राज्यसभा के सदस्य के रूप में उनका प्रयास होगा कि संसद का आध्यात्मीकरण हो। वह संसद में राजनीति नहीं बल्कि देश सेवा करेंगे। उनका प्रयास रहेगा कि शांतिकुंज का नारा ‘हम बदलेंगे युग बदलेगा’ संसद में भी साकार हो।
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बुधवार को राज्यसभा सदस्य चुने जाने पर अमर उजाला से वार्ता करते हुए डॉ. पंड्या ने कहा कि वह राष्ट्र की सेवा संकल्प लेकर शांतिकुंज पहुंचे थे। आचार्य श्रीराम शर्मा के जीवन आदर्शों का अनुसरण करते हुए इस दिशा में काफी काम करने का भी उन्होंने प्रयास किया है। लेकिन इन कार्यों के दौरान उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि यह रास्ता देश की संसद तक भी जाएगा।

अब मौका मिला है तो शांतिकुंज के आदर्शों को संसद के जरिए भी देश और दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। गंगा की हालत पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए जो योजनाएं बनाई हैं वे धरातल पर उतरें। उन पर पारदर्शिता के साथ काम हो। गंगा का उद्धार हो।
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इसके लिए वह पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उन्होंने माना कि देश में इस समय राजनीति में सब-कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लेकिन राजनीति का भी सुधार हो और बदलाव की बयार बहे, इसके लिए वह प्रयास करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शांतिकुंज प्रमुख होना राज्यसभा सदस्य होने से बड़ी बात है।

डॉक्टर से आध्यात्मिक गुरु तक का सफर

डॉ. प्रणव पंड्या - फोटो : AmarUjala
मनोनीत राज्यसभा सांसद एवं शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या का जन्म आठ नवंबर, 1950 को मुंबई में सत्यनारायण पंड्या और सरस्वती पंड्या के घर हुआ था। उनकी शिक्षा दीक्षा इंदौर में हुई। इनके पिता न्यायिक सेवा में वरिष्ठ अधिकारी रहे। उनके सेवानिवृत्ति के बाद से वह शांतिकुंज में रहते हैं। जबकि माताजी का देहावसान हो चुका है।

डॉ. पंड्या ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर से जनवरी 1972 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। यहीं से दिसंबर 1975 में मेडीसन में एमडी की उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त किया। जून 1976 से सितंबर 1978 तक भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) हरिद्वार और भोपाल के अस्पतालों में इन्टेंसिव केयर यूनिट के प्रभारी रहे।

वर्ष 1963 में वह शांतिकुंज के युग निर्माण योजना मिशन के संपर्क में आए। वर्ष 1969 से 1977 के बीच गायत्री तपोभूमि मथुरा और शांतिकुंज हरिद्वार में लगे कई शिविरों में भाग लिया। सितंबर 1978 में नौकरी से त्यागपत्र देकर स्थायी रूप से हरिद्वार आए।

मिल चुके हैं ये सम्मान एवं पुरस्कार
वर्ष 1998 में ज्ञान भारती सम्मान से सम्मानित। 1999 में हिंदू ऑफ द इयर पुरस्कार से एफआईए, एफएचए द्वारा सम्मानित। अमेरिका की विश्वविख्यात अंतरिक्ष इकाई नासा द्वारा वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के प्रचार प्रसार के लिए संस्तुति एवं विशेष सम्मान। भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार राष्ट्र सेवा सम्मान पुरस्कार से 2000 में सम्मानित।
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विश्वभर में शुरू की अश्वमेध यज्ञों की परंपरा

दीक्षांत समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. कलाम के साथ डॉ. पंड्या - फोटो : अमरउजाला
डॉ. प्रणव पंड्या के नेतृत्व में शांतिकुंज से विश्वभर में बौद्धिक अश्वमेध यज्ञों की परंपरा प्रारंभ की। अब तक संसार के अधिकतर भागों में अश्वमेध यज्ञ हो चुके हैं। भारत में ऐसा कोई प्रांत नहीं जहां इन यज्ञों का आयोजन न किया गया हो। ब्रिटेन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, रूस, जर्मनी आदि में भी अश्वमेध यज्ञ हो चुके हैं

ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के मार्गदर्शन में अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय के लिए ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान हरिद्वार की स्थापना जून 1978 में की। तब से इस संस्थान के निदेशक हैं। अभी तक शांतिकुंज आए हुए 80 हजार से अधिक साधकों पर यह प्रयोग-परीक्षण किए जा चुके हैं। संस्थान सभी आवश्यक विषयों पर पचास हजार से अधिक पुस्तकों के पुस्तकालय से सुसज्जित हैं।

डॉ. प्रणव पंड्या का प्रोफाइल
नाम - प्रणव पंडया
जन्म - 1950 मुंबई में
पिता- सत्यनारायण पंड्या
माता- सरस्वती पंड्या
पत्नी- शैल दीदी अधिष्ठात्री शांतिकुंज हरिद्वार
बेटा- चिन्मय पंड्या प्रति कुलपति देव संस्कृति विवि
शिक्षा- 1975 में एमजीएम मेडिकल कालेज इंदौर से मेडीसिन से एमडी
1976 में भेल में चिकित्सक के पद पर तैनाती
1978 में नौकरी से त्यागपत्र देकर हरिद्वार आ गए
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