उत्तराखंड सरकार ने नगर निगमों में जनप्रतिनिधियों के अधिकारों में कटौती की है।
कर निर्धारण की आपत्तियों और संपत्ति विवादों की सुनवाई का अधिकार कार्यकारिणी से छीनकर नगर आयुक्तों को हस्तांतरित कर दिया गया है। निगमों से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने सरकार के इस निर्णय को गलत बताया है। उन्होंने इस संबंध में जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की बात कही है।
अब तक नगर निगमों में पार्षदों की कार्यकारिणी समिति कर निर्धारण में आने वाली आपत्तियों और संपत्ति विवादों की सुनवाई करती थी। उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959) में किए गए संशोधन के अनुसार दोनों मामलों की सुनवाई निगमों के नगर आयुक्त या उनके द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी करेगा।
नगर निगम में देहरादून की कार्यकारिणी समिति में 12 (पांच पार्षदों में से एक) सदस्य हैं। मेयर इस कार्यकारिणी के अध्यक्ष होते हैं। इस कार्यकारिणी का चुनाव हर साल होता है।
पार्षदों में गुस्सा, करेंगे मुख्यमंत्री से शिकायत
जनप्रतिनिधियों से कर निर्धारण और संपत्ति विवाद के मामले की सुनवाई का अधिकार छीने जाने से नगर निगम के पार्षदों में गुस्सा है।
पार्षद सुशील गुप्ता, महिपाल धीमान, कमली भट्ट, बीना उनियाल, सतीश कश्यप, भूपेंद्र कठैत का कहना है कि जनता के कार्यों को जनप्रतिनिधि आसानी से हल कर देते हैं। जबकि अफसर इतना ध्यान नहीं देते। अफसरों को जनप्रतिनिधियों के अधिकार देना न्यायोचित नहीं है। इस संबंध में वे मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे।