सरकार ने राज्य में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए एक सौ लघु जलाशयों बनाए जाने की योजना बनाई है।
इसमें से चार लघु जलाशय बन गए हैं और दस के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इस कार्य में सिंचाई विभाग के साथ-साथ पेयजल विभाग, वन विभाग, कृषि और जलागम विभाग को भी दायित्व सौंपा गया है। वन विभाग ने जंगलों में एक हजार जल कुंड बना दिए हैं। विभाग को दस हजार जल कुंड बनाने का लक्ष्य दिया गया है।
गौरतलब है कि प्रदेश में लगभग सात लाख हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन है। इसमें से 3.394 हेक्टेयर जमीन ही सिंचित है। राज्य गठन के बाद 2015-16 में पहली बार सिंचन क्षमता में पांच फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रदेश में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा कई घोषणाएं की गई हैं।
उसमें लघु जलाशयों का निर्माण प्रमुख है। प्रदेश के लगभग सभी जिलों में लगभग एक सौ लघु जलाशयों का निर्माण कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को इससे सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। अभी तक चार जलाशयों का निर्माण कराया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया है। सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए सिंचाई विभाग के अलावा अन्य कई विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है।