सरकार चाहे कोई भी रही हो वह वोट बैंक के चलते मलिन बस्तियों पर मेहरबान रही है। पिछली हरीश रावत सरकार के समय अवैध रूप से सरकारी जमीनों पर बसी इन बस्तियों को नियमित करने का फैसला लिया गया।
नियमितीकरण की कार्रवाई भी शुरू हो गई। वहीं, मौजूदा सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कोर्ट के आदेश के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं की। खुद सरकार के चार विधायक गणेश जोशी, उमेश शर्मा, खजान दास और हरबंश
कपूर हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ कूद पड़े और सरकार पर अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाया। चार दिन में ही सरकार ने अतिक्रमणकारियों के सामने घुटने टेक दिए और कैबिनेट में अध्यादेश ले आई। जबकि इससे पहले
राजधानी में हजारों लोगों के अतिक्रमण तोड़े जा चुके हैं।
आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन का मामला बिल्कुल अलग है। वहां केवल परिवार नहीं बल्कि पशु, खेत व अन्य संपत्तियों का भी सवाल है। मलिन बस्तियों को हटाने के मामले में सरकार योजना बना रही है। प्रधानमंत्री आवास
योजना के तहत उन सबको आवास में शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा लैंड बैंक बनाकर अन्य जगहों पर भी उनके लिए आवास बनाए जाएंगे।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
पहाड़ के सभी संवेदनशील व असुरक्षित गांवों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए केंद्र के सहयोग से योजना बनाई जा रही है। राजस्व विभाग के पास सात लाख हेक्टेयर भूमि है। इस पर लोगों को विस्थापित किया जा सकता है। पर्वतीय
क्षेत्रों के लोगों को उनकी मौजूदा बसावट के आस-पास ही बसाने की योजना है।
-प्रकाश पंत, वित्त मंत्री, उत्तराखंड