उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। गांव में खोले गए अस्पताल अंतिम सांस गिन रहे हैं। नैनीताल जिले के ओखलकांडा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देख आप भी यही कहेंगे।
इस अस्पताल में मरीजों का इलाज टॉर्च की रोशनी से होता है। यह शर्मनाक स्थिति तब है जब सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रदेशभर में घूम-घूमकर अस्पतालों को ‘ऑक्सीजन’ देने की बात करते नहीं थक रहे।
मंगलवार शाम पेड़ से गिरकर घायल हुई महिला को अस्पताल लाया गया तो उजाला करने के लिए टॉर्च जलानी पड़ी। जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित इस अस्पताल में दो डॉक्टर, फार्मेसिस्ट और दो स्टाफ नर्स हैं।
दो करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर अस्पताल का भवन बनवाया गया है, लेकिन संसाधन आज तक नहीं जुटाए गए। जबकि अस्पताल पर 79 ग्रामसभाओं के लोग निर्भर हैं।