उत्तराखंड ऊर्जा निगम के कई अधिकारी काम के बजाय सचिवालय की परिक्रमा करने में लगे रहते हैं। इसका असर उपभोक्ता सेवाओं पर पड़ रहा है। निगम प्रबंधन की ओर से अब ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाई जा रही है।
ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एसएस यादव ने अधिकारियों-कर्मचारियों के आफिस टाइम में सचिवालय में रहने पर निगम के मानव संसाधन, परियोजना, परिचालन और वित्त के निदेशकों से जवाब मांगा है। निदेशकों को भेजे पत्र में एमडी ने कहा है कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अक्सर सचिवालय के विभिन्न दफ्तरों में घूमते नजर आते हैं।
ये निगम कर्मी बिना उच्चाधिकारियों से अनुमति लिए सचिवालय के कार्यालयों में पहुंच जाते हैं। ये अधिकारी और कर्मचारी ऊर्जा निगम के काम का नुकसान तो करते ही हैं, सचिवालय के विभिन्न कार्यालयों में जाकर दैनिक कार्यों में भी बाधा पहुंचा रहे हैं।
एमडी ने निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति के सचिवालय जाने वाले मुख्य अभियंता, महाप्रबंधक, अधीक्षण अभियंता और उप महाप्रबंधक समेत अन्य कर्मियों को चिन्हित कर रिपोर्ट तैयार करें। इसमें यह भी बताएं कि निगमकर्मी किस कार्य या उद्देश्य से सचिवालय गए थे।
यह भी सुनिश्चित करें कि भविष्य में निगमकर्मी बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के सचिवालय न पहुंचे। इस बारे में निगम के एमडी एसएस यादव से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पायी।
नहीं हो पाता उपभोक्ताओं की समस्या का समाधान
विद्युत उपभोक्ताओं की अक्सर शिकायत रहती है कि ऊर्जा निगम के ज्यादातर अधिकारी-कर्मचारी दफ्तरों में नहीं मिलते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को नये कनेक्शन, बिल सुधार, मीटर सुधार आदि कामों में कई दिन लग जाते हैं। बिजली कटौती, लाइनों के टूटने और जर्जर खंभों की शिकायत पर भी अधिकारी फील्ड में नजर नहीं आते।