उत्तराखंड में चिकित्सकों की कमी और नए चिकित्सकों के ज्वाइन नहीं करने से चिंतित स्वास्थ्य विभाग चैन्नई सहित दक्षिण भारतीय शहरों में संभावनाएं तलाशेगा।
राज्य गठन के बाद से चिकित्सकों की घटती संख्या सरकार के लिए बड़ी चिंता है। लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्तियों के नतीजे भी नाकारात्मक हैं, प्रदेश में चिकित्सकों के करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। अक्तूबर में दक्षिण राज्यों के चिकित्सकों को प्रदेश में भर्ती कराने के इरादों के साथ विभाग का दल चैन्नई रवाना होगा।
राज्य में चार वर्ष में 1300 पद विज्ञापित होने के बावजूद मात्र 150 चिकित्सक मिलने के बाद अब दक्षिण का रुख किया जा रहा है। तमिलनाडु में 80 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं, जिनसे हर वर्ष लगभग आठ हजार डॉक्टर पासआउट होते हैं।
कर्नाटक और उड़ीसा में भी मेडिकल कॉलेजों की संख्या उत्तराखंड के मुकाबले कहीं अधिक है। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए चैन्नई को मुख्य स्थल के तौर पर चुन रहा है, जहां से उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ छात्रों तक पहुंचाने के लिए प्रचार गतिविधियां संचालित होंगी।
वहां के स्वास्थ्य विभाग व चिकित्सा शिक्षा विभाग से मिलकर मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय बनाया जाएगा। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने बताया कि बोर्ड के माध्यम से होने वाली चयन परीक्षा के केंद्र भी चैन्नई में बनाए जाएंगे।
राज्य चिकित्सक च
चिकित्सक चयन बोर्ड को जिम्मायन बोर्ड को इसका जिम्मा दिया जाएगा। बोर्ड में उच्च रैंक से रिटायर एक चिकित्सक को चेयरमैन बनाया जाएगा जबकि डीजी हेल्थ और निदेशक चिकित्सा शिक्षा सदस्य रहेंगे। लोग सेवा आयोग से भर्ती में लगने वाली वर्षों की लंबी प्रक्रिया को बोर्ड कुछ ही माह में पूरा करेगा।
अब तक हुईं कोशिशें
- विशेषज्ञ और सामान्य संवर्ग को मर्ज कर किया एक
- अनुबंध चिकित्सकों का वेतन देश में सर्वाधिक कर दिया
- विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट के लिए पैकेज बढ़ाए गए
- कई स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों को पीपीपी मोड में किया
- दुर्गम में सेवाओं पर पीजी कोर्स के लिए प्राथमिकता