पोस्टकार्ड को पढ़कर भावुक हुआ डाकिया
वह पोस्टकार्ड को पढ़कर भावुक हो जाते हैं और बच्ची की प्रार्थना को सर्वोपरि मानते हुए केदारनाथ के लिए रवाना हो जाते हैं। 16 किमी पैदल दूरी तय कर डाकिया केदारनाथ पहुंचते हैं और सीधे मंदिर परिसर में भगवान केदारनाथ के सेवक नंदी महाराज के चरणों में बच्ची के लिखे पोस्टकार्ड को रखकर स्वयं भी उसके दादू के ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद वह धाम से लौट आते हैं।
इधर, कुछ दिन बाद मिष्टी के घर एक पत्र आया, जिसमें लिखा था कि तुम्हारे दादू जल्द ठीक हो जाएंगे। तुम खुद का भी ध्यान रखना .. तुम्हारे भोलेनाथ जी। कुछ समय बाद मिष्टी के दादा स्वस्थ हो जाते हैं और वह अब अपने दादा के साथ खूब खेल रही है।
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गौरीकुंड डाकघर के पोस्टमास्टर-पोस्टमैन गणेश गोस्वामी बताते हैं सितंबर 2024 में यह लघु फिल्म भारतीय डाक विभाग के दिल्ली कार्यालय से बनाई गई थी। इसमें लघु फिल्म का मुख्य उद्देश्य आस्था, भक्ति के साथ डाक विभाग की जिम्मेदारी को बताया गया था। वह स्वयं दुर्गम क्षेत्र में निवास करते हैं, तो समझते हैं कि किसी के लिए डाकघर में आने वाला पत्र कितने मायने रखता है।