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SDRF को ‘दुर्बल’ बना रही ऐसी तैनाती

Tue, 20 Jan 2015 10:47 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
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दैवी आपदा की दृष्टि से एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) एक महत्वाकांक्षी बल है। लेकिन यह बल भी अफसरों के लिए समायोजन, दंड स्वरूप के बदले में मिले तैनाती स्थल के रूप में बन गया है।
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40 वर्ष पार कर चुके जवानों की एंट्री का प्रावधान नहीं
कई सेनानायक बदल गए, सहायक सेनानायक के पद पर तो सेवानिवृत्त होने से कुछ ही दिन पहले अफसरों को तैनाती दी जा रही है। जबकि बल में 40 वर्ष पार कर चुके जवानों की एंट्री का प्रावधान नहीं है और 45 की उम्र पूरी चुके उप निरीक्षक भी बल में नहीं रह सकते हैं।

एसडीआरएफ का गठन 2013 में दैवी आपदा के बाद हुआ। 9 अक्तूबर 2013 को सेनानायक का पद सृजित हुआ लेकिन पहली तैनाती तीन महीने 20 दिन बाद हुई। आईपीएस नीरू गर्ग को 31 जनवरी 2014 को सेनानायक बनाया गया। लेकिन वह मात्र 17 दिन इस पद पर रहीं और फिर आईपीएस पी रेणुका देवी को यह जिम्मेदारी मिली।
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इसी बीच सीआरपीएफ के कमांडेंट धर्मेंद्र घुगत्याल प्रतिनियुक्ति पर आए और अक्तूबर के शुरूआत में ही उन्हें इस बल का सेनानायक बनाकर रेणुका देवी को हटा दिया गया। घुगत्याल ने ज्वाइन नहीं किया और करीब 15 दिन तक भ्रम की स्थिति बनी रही। इसके बाद फिर रेणुका देवी को ही सेनानायक बनाया गया।

सहायक सेनानायक के दो पद हैं। लेकिन कभी दोनों पर तैनाती नहीं रही। पहली तैनाती निरीक्षक से डिप्टी एसपी बने रघुवीर सिंह असवाल की 4 दिसंबर 2014 को हुई और वह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद एक जनवरी 2015 से निरीक्षक से डिप्टी एसपी बनी अंशु चौधरी को सहायक सेनानायक बनाया गया, वह भी इसी महीने रिटायर हो जाएंगी।

23 जुलाई 2014 को पहले उप-सेनानायक के रूप में नवनीत सिंह भुल्लर नियुक्त हुए।  एसपी सिटी देहरादून से हटाए गए भुल्लर को दंड स्वरूप इस बल में भेजा गया। हल्द्वानी में आत्मदाह कांड के चलते 23 दिसंबर 2014 को हटाए गए अपर पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट को भी दंड स्वरूप एसडीआरएफ का उप-सेनानायक बनाया गया और भुल्लर हल्द्वानी भेजे गए।

छह महीने में मिले तीन उप-सेनानायक
भट्ट का भी एसडीआरएफ में दिल नहीं लगा। जनवरी में हल्द्वानी के कशिश कांड और सीएम के वाहन पर हमले के चलते 10 जनवरी को भुल्लर को हटाकर फिर एसडीआरएफ में भेजा गया और भट्ट मौका पाकर विजिलेंस में तैनाती पाने में कामयाब रहे।

मसलन, छह महीने में इस बल को तीन उप-सेनानायक मिले। इस बल का यह हाल तब है जब प्रभावशाली आईपीएस संजय गुंज्याल इसके डीआईजी हैं। वैसे तो यह बल पीएसी के आईजी या डीआईजी के अधीन होना चाहिए, लेकिन एसडीआरएफ के लिए नई व्यवस्था बनी और इसके डीआईजी गुंज्याल हैं। इस बल में अभी कुल दो कंपनी काम कर रही हैं।

तैनाती एसडीआरएफ में, बने हैं हरिद्वार में ओएसडी
निरीक्षक से डिप्टी एसपी बने कुलदीप सिंह असवाल विगत दो जनवरी को एसडीआरएफ में सहायक सेनानायक बनाए गए। लेकिन उन्हें एसडीआरएफ में रहते हुए ही हरिद्वार जिले में ओएसडी बनाकर संबद्ध कर दिया गया। मतलब उनकी पोस्टिंग एसडीआरएफ में है और वह ओएसडी बनकर हरिद्वार में पोस्टिंग का मजा ले रहे हैं।

जो अधिकारी जितने दिन के लिए आता है, उसका अनुभव बल को मिलता ही है। भले ही वह थोड़े दिन रहे। बाकी बल को विकसित करने और मजबूत करने के लिए प्रयास निरंतर जारी हैं। रही बात सहायक सेनानायक के पदों पर तैनाती की तो युवा डिप्टी एसपी की मांग भेजी गई है।
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- संजय गुंज्याल, डीआईजी एसडीआरएफ
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