स्वास्थ्य महकमे के एक बड़े हाकिम की कुर्सी इस माह खाली होने जा रही है। इस बड़ी कुर्सी के कई दावेदार भी हैं।
यूं तो कुर्सी के लिए वरिष्ठता और योग्यता ही मानक है, लेकिन मामला तो माननीय की पसंद न पसंद का है। माननीय की पसंद वरिष्ठता में नीचे, लेकिन अन्य योग्यताओं में आगे एक अधिकारी हैं।
दूसरे ओहदेदार भी माननीय की कागजों पर बैठाई जाने वाली 'चिडिय़ा' का दम जानते हैं। लेकिन यह बात भी सच है कि चिडिय़ा भले कितनी दमदार है पर वरिष्ठता सूची को हवा में नहीं उड़ा सकती। अब माननीय के आगे यह सवाल खड़ा है कि कैसे अपने पसंदीदा मोहरे को कुर्सी तक पहुंचाएं।
निर्धारित मानक दरकिनार होने पर अदालत चिडिय़ा को पिंजरे में डाल सकती है। एक बार पहले भी वह यह दर्द झेल चुके हैं। सो इस बार नई चाल चलने की फिराक में हैं। अगर प्रक्रिया लटकेगी तो फाइल पर अपनी चिडिय़ा का वजन दिखाएंगे।
ऐसी स्थिति में उनकी बैठाई चिडिय़ा ही यह तय करेगी की कुर्सी पर कामचलाऊ हाकिम कौन होगा। चलो इस तरह ही सही पर पसंदीदा को कुछ महीनों के लिए ताज सौंप सकेंगे।