देहरादून रेलवे स्टेशन पर तबादला रुकवाने का खेल चल रहा है। हद तो तब हो गई जब तबादले की जद में आए एक अधिकारी के लिए यहां नया पद सृजित कर दिया गया।
दून स्टेशन पर कुछ कर्मी और अधिकारी कई सालों से जमे हैं। दिसंबर 2014 में सीनियर ट्रैफिक इंस्पेक्टर (एकाउंट) सुनील कुमार बलूनी की मौत के बाद इस पर सवाल भी उठे थे। सूत्रों के अनुसार, तब रेलवे ने ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भी तैयार की थी, जो लंबे समय से यहां पर अहम पदों पर जमे हुए हैं।
कुछ दिन पहले दून स्टेशन से एक अधिकारी का तबादला होना लगभग तय था। रेलवे के सूत्रों का कहना है कि अधिकारी ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए तबादला रुकवा दिया। बाकायदा उसके लिए एक नया पद सृजित कर दिया गया। उन्हें एक ऐसे सेक्शन का प्रमुख बना दिया गया, जिसका दून स्टेशन पर खास औचित्य ही नहीं है।
रेलकर्मियों का कहना है कि ये अधिकारी पिछले 10 साल से अधिक समय से दून स्टेशन पर ही जमा है। लेकिन जब भी तबादले की बात आती है तो वह इसे रुकवाने में लग जाता है।
या कुछ महीने दूसरी जगह जाकर फिर से वापस दून स्टेशन तबादला करा लेता है। डीआरएम सुधीर अग्रवाल ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। तबादले नियम के तहत ही होते हैं।