चारधाम यात्रा मार्ग पर भी काफी-काफी दूर तक पंप नहीं है। ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में सीमित पंप हैं। इसके चलते तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पेट्रोल-डीजल के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बरसात और आपदा के समय सड़क बंद होने पर कई इलाकों में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाती है। सड़कें न खुलने पर कई बार वाहन तक खड़े करने की नौबत आ जाती है।
ऐसे में राज्य में यह व्यवस्था फायदेमंद साबित हो सकती है। एलिंज कंपनी के एमडी इंद्रजीत प्रुथी ने शुक्रवार देर शाम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके औद्योगिक सलाहकार डा. केएस पंवार से मुलाकात कर योजना का खाका पेश किया।
अति ज्वलनशील होने के चलते पेट्रोल-डीजल के भंडारण और बिक्री के मानक बेहद कड़े हैं। इसके लिए जमीन के अंदर निर्धारित गहराई में लोहे का टैंक स्थापित किया जाता है। अभी तक जमीन के ऊपर टैंक या पहियों पर टैंक लगाकर पेट्रोल-डीजल की बिक्री की इजाजत नहीं थी।
अब केंद्र ने नीति में संशोधन करते हुए पोर्टेबल पंप के संचालन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए जमीन के ऊपर स्थापित सयंत्र से भी पेट्रोल-डीजल की बिक्री की जा सकती है। मंजूरी के बाद इस तरह का पंप खोलने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा।
राज्य सरकार करेगी आवंटन
चलते-फिरते पेट्रोल पंप का आवंटन राज्य सरकार करेगी। मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार डा. केएस पंवार ने बताया कि स्थायी पेट्रोल पंप की तर्ज पर भी आवंटन किया जाएगा। राज्य सरकार आवंटन की शर्तें भी तय कर सकती हैं।