मंगलवार को देहरादून स्थित आईएमए में कमांडेंट जनरल मानवेंद्र ने कैडेट्स को विभिन्न पहलुओं पर गुरुमंत्र दिए।
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कैडेट्स को कमांडेंट ने नसीहत दी कि बदलते समय के साथ घटते सामाजिक आर्थिक अंतर को भी समझना जरूरी है। जवान भी उसी इज्जत का हकदार है जिसकी अपेक्षा अफसर उनसे करते हैं।
सेना की चिंताएं बढ़ा दी
अफसरों और जवानों के बीच टकराव के मामलों ने सेना की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 133वें नियमित कोर्स के कैडेट्स से जनरल मानेंद्र सिंह ने कहा कि टेक्नोलॉजी के युग में समाजिक परिवेश बदला है।
पहले जो सामाजिक आर्थिक अंतर हुआ करता था, अब वह बेहद कम हो गया है। सेना में आने वाले जवान भी अब साधन संपन्न और जागरूक परिवारों से हैं।
ऐसे में भले ही वह जवान के तौर पर भर्ती हों, लेकिन पहले के मुकाबले अब उन्हें उसी मान-सम्मान की दरकार है जो सेना में आने से पहले उनकी समाज में है।
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जनरल मानवेंद्र ने कहा कि सेना में अफसर बनकर अपनी रेजिमेंट में जाने के बाद इस बात का कड़ाई से अनुपालन करना होगा कि खुद आप उन्हीं में से एक हैं। रुतबे की धौंस, गुस्सा, उत्पीड़न, स्वार्थ और मनमानी जैसी बात नहीं होनी चाहिए।
जवान को सहयोगी और साथी मानें
बतौर अफसर जो जिम्मदारी मिली है, वह सैनिकों और जेसीओ के हितों के लिए है। न केवल सैनिकों बल्कि उनके परिवारों के प्रति भी इज्जत व स्नेह का भाव होना चाहिए।
अफसरों को अपने जवानों के अनुरूप ढलना होगा। जवान को सहयोगी और साथी मानने पर ही वह हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा होगा।
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भविष्य के सैन्य अफसरों को अपने कर्म, कथन और व्यवहार में संयम और सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई। कमांडेंट ने कहा कि कोर्स के दौरान पाठ्यक्रम के साथ कई अन्य बदलावों के बीच कैडेट्स ने अथक प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा कि सेवा के दौरान कई मौके ऐसे आएंगे जिसमें अफसर को चरित्र, आचरण, समर्पण और सामर्थ्य के बूते खुद को खरा साबित करना होगा।