उत्तराखंड की सुस्ती और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते प्रदेश में गरीबों को प्राइवेट अस्पतालों में निशुल्क उपचार नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त अंशदान से चलने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत भुगतान नहीं होने पर प्राइवेट अस्पतालों ने उपचार बंद कर दिया है। जिसके चलते योजना में शामिल करीब दो लाख 85 हजार लाभार्थियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को प्राइवेट अस्पतालों में निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) की शुरूआत की थी। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी के प्रीमियम के तौर पर बीमा कंपनी को 167 रुपये का भुगतान करना था।
इसमें 75 फीसदी अंशदान केंद्र और 25 फीसदी राज्य सरकार को करना था। शुरूआत में बड़ी संख्या में गरीबों ने योजना का लाभ उठाया, लेकिन पिछले करीब दो वर्ष से योजना के तहत बीमा कंपनी को भुगतान नहीं हुआ है।
आलम यह है कि योजना के तहत बीमा कंपनी का करीब 22 करोड़ का भुगतान बकाया है। इसमें से करीब तीन करोड़ राज्य सरकार और शेष करीब 19 करोड़ केंद्र सरकार को देना है। इसके चलते प्राइवेट अस्पतालों का करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है।
50 लाख का क्लेम पास
योजना के तहत प्राइवेट अस्पतालों के करीब 50 लाख के बिल पास हो चुके हैं। बीमा कंपनी ने करीब 50 लाख के क्लेम भुगतान के लिए तैयार रखे हैं। लेकिन भुगतान से पहले कंपनी अपने प्रीमियम का भुगतान करने की मांग कर रही है। इसके चलते अस्पतालों को भुगतान नहीं हो पा रहा है।
केंद्र और राज्य सरकार को बीमा कंपनी को करीब 22 करोड़ का प्रीमियम देना है। जब तक प्रीमियम जमा नहीं होगा, हम अस्पतालों को कैसे भुगतान करेंगे। योजना बंद होने का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ेगा, जो योजना का लाभ उठा रहे थे।
- संजय जोशी, नोडल अधिकारी, यूनाइटेड इंडिया
योजना के तहत उपचार बंद होने की जानकारी हमारे पास नहीं आई है। अगर ऐसा है तो इस संबंध में बातचीत की जाएगी। केंद्र से बजट ना मिलने के चलते बीमा कंपनी को प्रीमियम का भुगतान नहीं हो सका है।
- डॉ. नीरज खैरवाल, नोडल अधिकारी, आरएसबीवाई