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पूनम को अपनों ने ही बना दिया 'गुनाहगार'

Sun, 09 Feb 2014 12:02 PM IST
बिश्ान सिंह बोहरा/अमर उजाला, देहरादून
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हत्या के आरोप में दो साल चार माह जेल में बंद करीब 21 वर्षीय पूनम को सलाखों से आजादी मिली तो वह फफक कर रो पड़ी।
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शुक्रवार को अदालत ने तो उसे दोष मुक्त कर दिया, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा कि अपनों के दिलों में पनपी नफरत को कैसे दूर करेगी। पूनम पर हत्या का आरोप लगा तो अपनों ने उससे किनारा कर लिया। किसी ने भी उसकी जमानत तक नहीं ली।

पति तक उससे मिलने नहीं आया। एकलौती बेटी से मिलने के लिए वह पल-पल तड़पती रही। अदालत ने पूनम को भले ही दोष मुक्त करार दे दिया लेकिन अपनों की सजा उसे ता-उम्र सालती रहेगी।
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किसी ने जमानत नहीं कराई

पथरीबाग निवासी रविशंकर मौर्य की तहरीर पर 19 सितंबर 2011 को पटेलनगर थाना पुलिस ने उसके बड़े भाई इंद्रपाल सिंह की हत्या के मामले में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इंद्रपाल का शव रिपोर्ट दर्ज होने से एक दिन पहले बांबेबाग स्कूल के पीछे पथरीबाग के खाली खेत में मिला था। पुलिस ने जांच के बाद 25 सितंबर 2011 को इंद्रेशनगर वाल्मीकि बस्ती की पूनम और राजीवनगर चमनपुरी के सुंदर को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद सुंदर के रिश्तेदारों ने तो उसकी जमानत करा ली, लेकिन पूनम की किसी ने जमानत नहीं ली। रिश्तेदार सहित पति और सास-सुसर ने पूनम से मुंह फेर लिया। आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि वह अपने बचाव में वकील कर सके।

अधिवक्ता सुजाय बॉस ने की मदद

वर्ष 2012 में अदालत के आदेश पर अधिवक्ता सुजाय बॉस ने न्याय मित्र के रूप में पूनम की पैरवी की। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश सुशील तोमर की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से इस मामले में 12 गवाह पेश किए गए।

पुलिस का दावा था कि इंद्रपाल के हाथ में मिले कुछ बाल पूनम के थे। लेकिन प्रयोगशाला की जांच में यह बात गलत साबित हुई। अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में भी विरोधाभास था।

इसी की बिना पर अदालत ने पूनम को दोष मुक्त कर दिया। लेकिन पूनम से हत्या का दाग धुलने में दो साल चार माह लग गए।
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मिलने तक नहीं आया कोई

शुक्रवार देर शाम फैसला सुनते ही पूनम अदालत में रो पड़ी। कहा कि उसे झूठा फंसाया गया था। यह पूछने पर कि वह अब कहां जाएगी? तो उसने पति के पास जाने के लिए कहा।

हालांकि, वह इस बात का जवाब नहीं दे पाई कि जो पति जेल में उससे मिलने नहीं आया और जिसने उसकी जमानत तक नहीं कराई वह उसे अपने साथ कैसे रखेगा। पूनम जब जेल गई थी उसकी पांच साल की बेटी थी।

जब सभी परिजनों ने उससे किनारा कर लिया तो उसे बेटी को अपनी चाची के पास पंजाब भिजवा दिया था। पूनम ने बताया कि वह सबसे पहले अपनी लाडली से मिलने जाएगी।

पूनम के पिता रिक्शा चलते हैं और पति ड्राइवर है। कई बार पूनम को कहा गया कि पिता, पति या किसी अन्य रिश्तेदार को लेकर आओ, लेकिन उसकी जमानत के लिए कोई नहीं आया।
- सुजाय बॉस, अधिवक्ता
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