केंद्र सरकार की ओर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किए जाने के बाद आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने व प्रदूषण जांच केंद्रों पर गाड़ियों की जांच कराने को लेकर मारामारी जारी है। शासन व परिवहन विभाग के अधिकारियों के इस आश्वासन के बावजूद कि अभी प्रदूषण व इंश्योरेंस के कागजातों की जांच कोे लेकर कोई जांच अभियान नहीं चलाया जाएगा। इसके बावजूद गाड़ी मालिकों में बेकरारी है।
आलम यह है कि रविवार को अवकाश होेने के बावजूद राजधानी के सभी 19 प्रदूषण जांच केंद्रों पर गाड़ियों की जांच कराने को लेकर मारामारी रही। गाड़ी मालिक रविवार को गाड़ियों लेकर प्रदूषण जांच केंद्रों पर पहुंचे। आखिरकार कई घंटे की जद्दोजहद के बाद गाड़ी की जांच कराई, तब राहत की सांस ली। प्रदूषण जांच केंद्रों पर जिसकी गाड़ी के प्रदूषण की जांच हो गई तो वह इसे जंग जीतने से कम नहीं मान रहा है।
नए प्रदूषण जांच केंद्रों खोलने को 150 आवेदन
गाड़ियों की प्रदूषण जांच को लेकर मची मारामारी के बीच राजधानी में 150 नए जांच केंद्र खोलने के आवेदन जाम हुए हैं। दूसरी ओर परिवहन आयुक्त के आदेश पर विभागीय अधिकारियों ने रविवार को उन केेंद्रों की जांच की, जहां नए प्रदूषण जांच केंद्र खोले जाने हैं। एआरटीओ अरविंद पांडे का कहना है कि जल्द ही नए प्रदूषण जांच केंद्र खोल दिए जाएंगे और गाड़ियों की जांच को लेकर मची मारामारी कम हो जाएगी।
पर्वतीय इलाकों में कम हैं जांच केंद्र
गाड़ियों के प्रदूषण जांच को लेकर तो स्थिति थोड़ी ठीक है। राजधानी में 19 जांच केंद्र, हरिद्वार में 20 केंद्र और औसतन इतने ही केंद्र नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में हैं। परिवहन विभाग के अनुसार पूरे प्रदेश में कुल 96 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। जिनमें मैदानी इलाकों में अधिक हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, जैसे जिलों में इनकी संख्या बहुत कम है। ऐसे में वाहन स्वामियों को दिक्कत हो रही है। राजधानी से सटे मसूरी में ही एक भी केेंद्र नहीं है। ऐसे में वहां के वाहन स्वामियों को जांच कराने को लेकर देहरादून आना पड़ रहा है।
रविवार को 12 बजे करीब आईएसबीटी फ्लाईअवर के पास प्रदूषण जांच केंद्र में वाहनों की जांच करवाने के लि?