संजय गुप्ता लक्सर से भाजपा प्रत्याशी हैं।
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अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ आग उगलने वाले लक्सर के विधायक संजय गुप्ता और उनके परम मित्र हरिद्वार ग्रामीण के विधायक स्वामी यतीश्वरानंद जिस तरह से तल्ख तेवर दिखा रहे हैं, ये केवल उन्हीं की नाराजगी है या फिर उनके पीछे कोई और है। इसे लेकर दिनभर राजनीतिक हल्कों में कयास लगाए जाते रहे। बात किसी निर्णय तक तो नहीं पहुंची लेकिन चर्चाओं का दौर जारी है।
दरअसल, संजय गुप्ता और स्वामी यतीश्वरानंद दोनों ही पिछले साल दूसरी बार विधायक चुने जाने के बाद से सरकार से संतुष्ट नहीं दिखे। संजय गुप्ता तो गौकसी को लेकर कई बार सरकार के खिलाफ मुखर हो चुके हैं और पुलिस थानों में धरने भी दे चुके हें। स्वामी यतीश्वरानंद ने भी कई बार अपनी नाराजगी भरी प्रतिक्रिया दी है। पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के हरिद्वार आने के दौरान हैलीपैड पर अधिकारियों से हुई उनकी झड़प भी उनकी नाराजगी का ही हिस्सा मानी गई थी।
हरिद्वार भाजपा में है दो गुट
भाजपा जिले में अभी तक सीधे-सीधे दो गुटों में बंटी है। एक गुट शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के नेतृत्व में तथा दूसरा उनके विरोध खेमा है। स्वामी यतीश्वरानंद कभी कौशिक के गुट में ही हुआ करते थे, जबकि संजय गुप्ता हमेशा से मदन विरोधी खेमे में रहे हैं। वर्ष 2007 में गुटबाजी के समीकरण बदले। चुनावों से पहले संजय और स्वामी की अगुवाई में मदन कौशिक विरोधी गुट को प्रदेश के बड़े भाजपा नेताओं का आशीर्वाद मिला। इस समय संजय और स्वामी दोनों कौशिक विरोधी गुट खड़ा रहता है। यही वजह है कि अक्सर यह चर्चा उठती रही है कि संजय और स्वामी जो आरोप लगाते हें क्या कहीं उनके पीछे कोई और तो नहीं है।
धामी, कोश्यारी और निशंक भी है करीबी
विधायक संजय और स्वामी राजनीतिक रूप से नजदीकी को देखते हुए इस बारे में खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी तो कभी नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी नाम कौशिक विरोधी धड़े को स्पोर्ट करने के लिए आता है। जबकि हरिद्वार से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के भी ये दोनों ही विधायक काफी करीबी बताए जाते हैं। दिनभर चर्चा होती रही कि क्या यह बयानबाजी केवल शिकायत करने तक ही सीमित है या फिर किसी नई राजनीति घटनाक्रम को हवा दे रहे हैं, हालांकि दोनों ही विधायक इस बारे में किसी भी तरह की राजनीति नहीं होने और अपने आपको जनता के प्रति समर्पित होने की बात कहते रहे हैं।