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सियासत ने कर दी हेल्थ की सेहत खराब

Fri, 29 Nov 2013 12:38 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में महानिदेशक पद पर तैनाती के लिए राजनीति हावी रही है।
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हर बार राजनीतिक कारणों से डीजी की तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार किया जाता है जिसका खामियाजा यह है कि बीते डेढ़ वर्ष में तीसरे बार हाईकोर्ट ने डीजी की तैनाती के लिए दखल दिया है। इससे सरकार की राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्वास्थ्य महानिदेशक में चल रहा है खेल
बीते डेढ़ वर्ष में डीजी की स्थाई तैनाती पर गौर किया जाए तो साफ होता है कि आखिर राज्य के स्वास्थ्य महानिदेशक में किस तरह से खेल चल रहा है।

कोर्ट आदेश से डीजी बने डॉ. आरपी भट्ट के 31 जुलाई 2012 को रिटायरमेंट के बावजूद डीपीसी कर स्थाई नियुक्ति के बदले कार्यवाहक डीजी का डॉ. सीपी आर्य को प्रभार दिया गया, जबकि वरिष्ठता के आधार पर डॉ. आरके पंत की तैनाती होनी थी।
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डॉ. पंत ने हाईकोर्ट में डीजी की डीपीसी के लिए वाद दाखिल किया जिसके बाद जनवरी 2013 में उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद महज सात दिन के लिए डीजी बनाया गया।

डॉ. पंत की रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठता सूची में सबसे आगे डॉ. योगेश शर्मा डीजी बने, जिनकी अगस्त में डॉ. शर्मा की रिटायरमेंट के बाद डीपीसी में देरी से डॉ. जीएस जोशी को कार्यवाहक पद दिया गया।

अभी विभाग में सबसे वरिष्ठ निदेशक डॉ. पांगति तैनाती के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए हैं। हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह के भीतर डीपीसी करवाने के आदेश दिए हैं, जिससे डॉ. पागंती के डीजी बनने का रास्ता साफ हो गया है।

शासन को कोर्ट आदेश का इंतजार
हाईकोर्ट के आदेश से पहले ही डीजी हेल्थ की डीपीसी को लेकर शासन ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव को भेज दिया है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश के गुरुवार को छुट्टी से लौटने के बाद अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डीपीसी की तिथि तय होगी।
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लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश की कापी आने के बाद शासन प्रक्रिया को पूरा करेगा। डॉ. पांगती को मौजूदा कार्यवाहक डीजी के बदले प्रभार देने की तैयारी भी है जबकि डीपीसी के बाद उन्हें स्थाई प्रभार मिल सकेगा।

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