राजधानी देहरादून की संशोधित महायोजना में दांव पेच इतने चले कि कमेटी की सिफारिशें धरी रह गईं और सियासी साठगांठ से अपने-अपने हित साधे गए।
पढ़ें, दून के युवाओं को अपना 'शिकार' बनाएंगे मोदी
कहीं राजनेताओं की रजामंदी पर मुहर लगी तो कहीं बिल्डरों की ही बात रखी गई। कुल मिलाकर विकास के इस ब्लूप्रिंट में तकनीकी खामियों की लंबी लकीरें उभर कर सामने आ गई हैं।
राजनीतिक सिफारिशें रही अहम
संशोधित मास्टर प्लान को जारी करने में राजनीतिक सिफारिशें भी अहम रही हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस से लेकर भाजपा तक के नेताओं ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों के भू उपयोग को बदलवाने के लिए जमकर सिफारिशें कीं।
कांग्रेस की ओर से कागजी तौर पर कोई पत्राचार तो नहीं किया गया लेकिन भाजपा के दो बड़े नेताओं की ओर से केदारपुरम और देहराखास के लिए अपने लेटर पैड पर संस्तुति की गई और उसे मान भी लिया गया है।
कांग्रेस नेता की हो गई बल्ले-बल्ले
भाजपा के कार्यकाल में 2008 में जब मास्टर प्लान जारी हुआ था उस समय एक कांग्रेस नेता की जमीन सरकारी कार्यालय में दर्शा दी गई थी। तब इसको लेकर कांग्रेस नेता ने प्रीतम रोड स्थित एमडीडीए के बाहर प्रदर्शन भी किया था।
पढ़ें, ऐसा क्या हुआ कि रामदेव के गहरे दोस्त हो गए 'जुदा'
इस बार कांग्रेस सरकार बनने से बाजी पटल गई और संशोधित मास्टर प्लान में महाशय की बन आई।
जो भी हुआ मानकों से परे
दरअसल मानकों को ध्यान में रखकर न तो मास्टर प्लान बनाया गया था और न ही संशोधन में इसका ख्याल रखा गया गया।
उत्तरांचल इंजीनियर्स एवं ड्राफ्टमैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी संगल बताते हैं कि मास्टर प्लान बनाते समय औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक मनोरंजन, परिवहन एवं संचार, खेती एवं हरित क्षेत्र, आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी के तहत कोटा तय किया गया है।
कोटे के अनुसार ही हर श्रेणी की जमीनों को दर्शाना होता है लेकिन खेल करने के चक्कर में मानक नहीं पूरा हो पाते। ऐसे में मानकों को कागजों में पूरा दिखाने के लिए जंगल की जमीन को खेती या अन्य में दर्शा दिया गया है।
नहीं लागू की गईं सिफारिशें
एमडीडीए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी की ओर से पूर्व के मास्टर प्लान को ठीक करने के लिए तमाम महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए थे जिससे खामियों को ठीक किया जा सके। लेकिन, शासन स्तर पर कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार करसियासी सिफारिशों को स्थान दिया गया।
कौन है एमडीडीए का असरदार अफसर
संशोधित मास्टर प्लान को तैयार कराने में एक एमडीडीए के अफसर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 50 फीसदी से अधिक बदलाव उन्हीं की सलाह पर किए गए हैं।
सूत्र बताते है कि संशोधित मास्टर प्लान के स्वरूप को बिगाड़ने में इस अफसर का खास रोल रहा है। इसका खामियाजा भी बाद में एमडीडीए को ही भुगतना पड़ेगा।
ज्यादातर लोगों की समझ से परे था मानचित्र
एमडीडीए कार्यालय में संशोधित मास्टर प्लान का मानचित्र लगा दिया गया है। इसे देखने के लिए सोमवार को भारी संख्या में आम लोग पहुंचे थे।
इनमें से ज्यादातर लोगों को मास्टर प्लान का खाका समझ में ही नहीं आया। कुछ लोग भूउपयोग परिवर्तन होने से खुश भी नजर आ रहे थे और कोई टिप्पणी कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।