देखिए, कैसे पुलिस का एक आम घोड़ा 'शक्तिमान' बन गया 'सेलिब्रिटी'
police horse shaktiman
- फोटो : file photo
भाजपा विधानसभा कूच के दौरान 14 मार्च को पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग टूट गई थी। शक्तिमान के घायल होने की वजह भाजपा विधायक गणेश जोशी द्वारा उस पर हमला बताया गया।
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पुलिस का घोड़ा शक्तिमान
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शक्तिमान पर हमला करते हुए विधायक गणेश जोशी की तस्वीरें वायरल हो गई थीं। इसे देश दुनिया में खूब देखा गया था। इस मामले में भाजपा विधायक पर मुकदमा कायम है। इसके बाद देश दुनिया से शक्तिमान के लिए दुआओं का दौर चला और भाजपा विधायक गणेश जोशी को काफी भर्त्सना झेलनी पड़ी।
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शक्तिमान
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शक्तिमान के इलाज के लिए अमेरिका से डॉक्टर बुलाए गए। गैंगरीन फैलने से बचने के लिए घायल टांग को काटना पड़ा था। उसकी जगह नई टांग लगाई गई लेकिन इन सबके बावजूद शक्तिमान को बचाया नहीं जा सका।
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पुलिस का घोड़ा शक्तिमान
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टांग के इलाज के लिए एनेस्थीसिया देने के दौरान शक्तिमान हमेशा के लिए सो गया। इसके बाद शक्तिमान को सम्मान देने की राजनीति शुरू हुई। शक्तिमान की मौत एक बार फिर सुर्खी बनी।
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उपचार के दौरान घोड़े को उठाती टीम।
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उत्तराखंड की कांग्रेस की सरकार ने शक्तिमान को सम्मान देने की बात कहते हुए राजधानी देहरादून के रिस्पना चौक पर शक्तिमान की प्रतिमा लगाने का फैसला लिया।
देखिए, कैसे पुलिस का एक आम घोड़ा 'शक्तिमान' बन गया 'सेलिब्रिटी'
पुलिस का घोड़ा शक्तिमान
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रिस्पना चौक का नाम शक्तिमान चौक रखने का फैसला लिया गया। पुलिस ने भी अस्तबल के बाहर शक्तिमान की प्रतिमा लगाने की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए। पुलिस लाइन की प्रतिमा करीब दस दिन पहले बनकर तैयार हो गई थी, जबकि रिस्पना पुल की प्रतिमा को तीन दिन पहले स्थापित किया गया। एमडीडीए को उसके सौंदर्यकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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बेजुबान 'शक्तिमान'
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इसी दौरान शक्तिमान की प्रतिमा लगाने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध होने लगा। चर्चाएं होने लगीं कि सरकार उत्तराखंड की महान विभूतियों को छोड़कर घोड़े की प्रतिमा लगा रही है जो कि गलत है। गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के आंदोलनकारियों को सम्मान देने की मांग उत्तराखंड में होती रही है। माना जा रहा है प्रतिमा अनावरण के बाद किसी विवाद से बचने के लिए सीएम ने प्रतिमा अनावरण से पीछे कदम पीछे खींचे हैं।