योगगुरु रामदेव बेशक इंकार करते हों कि टिकटों का बंटवारा भाजपा का अंदरूनी मामला है और उनका इसमें किसी प्रकार का कोई दखल नहीं है। लेकिन हकीकत इससे उलट है।
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अंदरखाने की खबर यह है कि बाबा ने भाजपा के टिकटों में इस बार खूब दखल दिया। पाटलीपुत्र (बिहार) से लेकर हरिद्वार तक के टिकटों में बाबा का हस्तक्षेप रहा। अगर यही स्थिति रही तो योगगुरु को राजनीतिक गुरु बनने में देर नहीं लगेगी।
कभी बाबा थे सबको प्यारे
एक समय था जब योग गुरु बाबा रामदेव सभी दलों के प्यारे थे। पतंजलि योगपीठ का उद्घाटन हुआ तो लालू प्रसाद यादव से लेकर एनडी तिवारी और तमाम भाजपाई मौजूद थे। कालाधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यूपीए सरकार से बाबा की ठन गई।
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एक बार तो बाबा ने सियासी विकल्प तक देने का ऐलान कर दिया लेकिन मोदी को पतंजलि बुलाकर उन्होंने पहली बार उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया तो अपने सियासी विकल्प को भाजपा तक समेट दिया।
भविष्य में बढ़ेगा सियासत में दखल
महीनों से बाबा मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए शिविर कर रहे हैं। अलबत्ता, मोदी को समर्थन देने की बाबा कुछ कीमत वसूलना चाहते थे। टिकटों के बंटवारे में दखल इसी बात की पुष्टि करता है, हालांकि बाबा इससे बिलकुल इंकार करते हैं। बाबा को जानने वाले तो यहां तक कहते हैं कि भविष्य में उनका सियासत में दखल और बढ़ेगा।
दूसरे प्रदेशों में भी बाबा का असर
बिहार की पाटलिपुत्र सीट पर भाजपा ने राजद से आए रामकृपाल यादव को टिकट दिया तो बाबा गुस्से से लाल-पीले हो गए। इसके बाद बाबा ने बिजनौर से स्वामी ओमवेश की पैरवी की।
(तस्वीरों में देखिए उत्तराखंड की होली)
ओमवेश बिजनौर की चांदपुर सीट से तीन बार विधायक और यूपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। यहां पर एक बड़ी धार्मिक संस्था के आ जाने से बाबा को पीछे हटना पड़ा।
बाबा के चलते ही मिला निशंक को टिकट
इसी बीच हरिद्वार सीट पर तो पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के लिए बाबा ने वीटो लगा दिया। बताया जाता था कि टिकट के ऐलान से पूर्व विधायक मदन कौशिक की दावेदारी सबसे ऊपर थी। लेकिन बाबा ‘चेतावनी’ पर पार्टी ने निशंक को टिकट दे दिया।
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बताया जाता है कि बाबा अब पंजाब की गुरदासपुर सीट पर अड़े हैं। पार्टी यहां से पूर्व सांसद विनोद खन्ना को टिकट देना चाहती है लेकिन बाबा अपने एक चेले की पैरवी कर रहे हैं।