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हेंप की व्यावसायिक खेती के लिए बनेगी नीति, पौधे से रेशा और बीज ही इस्तेमाल करने की अनुमति

Fri, 10 Jan 2020 12:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • किसानों को होगी एक हेक्टयर भूमि पर तीन लाख रुपये की आमदनी
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भांग की खेती नष्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राज्य में इंडस्ट्रियल हेंप (भांग की एक प्रजाति) की व्यावसायिक खेती के लिए नीति बन रही है। जंगली जानवरों व बंदरों की समस्या और सिंचाई सुविधा के अभाव में बंजर हो रहे खेतों में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ भी इंडस्ट्रियल हेंप की खेती को सही मान रहे हैं। लेकिन हेंप की खेती केनाम पर प्रदेश में नशे का कारोबार न पनपे इसकी भी चिंता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तीन माह में तैयार होने वाली हेंप की खेती से किसान को एक हेक्टेयर भूमि पर करीब तीन लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। 

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प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने अमेरिका, फ्रांस, यूरोप, कनाडा व चीन की तर्ज पर पहली बार उत्तराखंड में इंडस्ट्रियल हेंप की खेती को मंजूरी दी है। चार साल पहले तैयार आबकारी विभाग ने लाइसेंस पॉलिसी बनाई थी। इस नीति के आधार पर इंडियन इंडस्ट्रियल हेंप एसोसिएशन को पहला लाइसेंस जारी किया था।

अब शासन ने व्यावसायिक खेती के लिए सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई को नोडल एजेंसी नामित किया है। वहीं, व्यावसायिक खेती के लिए सरकार नीति भी बनाएगी। इंडस्ट्रियल हेंप भांग की एक प्रजाति है, जिसमें नशे की मात्रा सबसे कम 0.30 टीएचसी पाई जाती है। हालांकि सरकार ने हेंप के पौधे से सिर्फ बीज और रेशे का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। फूल व पत्तियों का प्रयोग करना प्रतिबंध है। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि प्रदेश में किस तरह से इंडस्ट्रियल हेंप की खेती की जा सकती है, इसके लिए नीति बनाई जाएगी। 

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भांग के रेशे से बनते हैं ये उत्पाद

इंडस्ट्रियल हेंप के पौधे से तैयार होने वाले फाइबर से कार की बॉडी तक बन रही है। इसके अलावा पेपर, टैक्सटाइल, पेंट, वारनिश, लुब्रिकेंट ऑयल आदि तमाम तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। फूल व पत्तियों का प्रयोग दवाइयों, सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों में किया जाता है। बाजार में फाइबर की डिमांड होने से किसानों को इसका लाभ मिलेगा।

इंडस्ट्रियल हेंप के प्रति लोगों में नकारात्मक सोच है कि यह भांग है। जबकि हेंप में नशे की मात्रा बहुत ही कम होती है। इससे तैयार होने वाले फाइबर की काफी डिमांड है। उत्तराखंड में किसानों को इसकी खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। हेंप के बीज की टेस्टिंग के बाद ही किसानों को दिया जाता है। पौड़ी जनपद के सैकड़ों किसान खेती करने के लिए तैयार हैं। लेकिन नीति न बनने के कारण लाइसेंस जारी नहीं हो रहे हैं। - मीनाक्षी, प्रभारी, इंडियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन

प्रदेश में बंजर भूमि पर इंडस्ट्रियल हेंप की खेती किसानों के लिए मुफीद हो सकती है। खास बात यह है कि इस पौधे को जंगली जानवर व बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और सिंचाई की जरूरत भी नहीं होती है। प्रदेश में विपरीत परिस्थितियों में भी इसकी खेती की जा सकती है। लेकिन अभी इंडस्ट्रियल हेंप की खेती और उपयोग पर और रिसर्च करने की जरूरत है। - नृपेंद्र चौहान, वैज्ञानिक, एरोमा
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