देहरादून। वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में पुलिस जल्द ही तकनीकी उलझनों से निपटने का रास्ता खोज लेगी। इसके लिए मामलों की प्राथमिक जांच और फिर विवेचना करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
दरअसल, छह साल पहले रेंज स्तर पर जमीन की खरीद फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी की जांच को एसआईटी बनी थी। शुरुआत में एसआईटी में काम करने वालों के सामने भी तमाम तकनीकी समस्याएं आईं तो इसके लिए राजस्व के कर्मचारियों की मदद ली गई। अधिकारियों की ओर से पुलिस को प्रशिक्षित भी किया गया, लेकिन अब एसआईटी को रेंज स्तर से हटाकर जिलों में बना दिया गया है। जमीन के मामलों में पुलिस किसी विशेषज्ञ की सलाह या किसी अन्य तरह से मामले की तह तक पहुंच जाती है, लेकिन बैंक फ्रॉड और ऋण संबंधी मामलों में तकनीकी पेंच फंस जाते हैं। ऐसे में वित्त विशेषज्ञ का हर समय उपलब्ध होना बेहद मुश्किल होता है। लिहाजा, अब पुलिसकर्मियों को वित्तीय मामलों की समझ के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। रेंज कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सभी सातों जनपदों में फेज वाइज यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए योजना तैयार की जा रही है।
हजारों मामले होते हैं हर साल दर्ज
इकॉनोमिक फ्रॉड के रेंज के सथी सातों जनपदों में हर साल हजारों मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। इनमें सबसे अधिक देहरादून जिले में 400 से अधिक मुकदमे हर साल रजिस्टर्ड होते हैं। इनकी विवेचना थाना स्तर पर होती है।
एसटीएफ में बनी है ईओडब्ल्यू
गत वर्षों में बड़े इकॉनोमिक फ्रॉड की प्राथमिक जांच के लिए ईओडब्ल्यू (इकॉनोमिक फ्रॉड विंग) बनाई गई थी। इसका गठन मार्च 2018 में किया गया था, लेकिन यह विंग भी प्राथमिक जांच के बाद मुकदमों को थानों में ही दर्ज करवाती है। इसके बाद विवेचना थाना के स्टाफ को ही करनी होती है।
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इकॉनोमिक फ्रॉड से जुड़े मुकदमों की विवेचना मजबूत कराने के लिए दरोगाओं को प्रशिक्षित कराया जाएगा। ताकि, कोर्ट में भी इन मुकदमों की मजबूत पैरवी हो सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके। इसके लिए जल्द ही काम शुरू हो जाएगा।
-अभिनव कुमार, आईजी गढ़वाल रेंज