चाचा-भतीजा हत्याकांड में हिरासत में लिए गए चार युवकों को झूठा फंसाने के आरोप में सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे कोतवाली में हुए बवाल में कई महिलाएं शामिल रही। योजना के तहत पुरुषों ने महिलाओं को जानबूझकर ही आगे किया था।
मारपीट की शुरुआत महिलाओं की ओर से की। भीड़ का मानना है कि महिलाओं की वजह से पुलिस पीछे हट जाएगी। हुआ भी यही। महिलाओं को देखकर सुबह-सुबह ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पहले बैकफुट पर आए, लेकिन हालात जब बेकाबू होने लगे तो उन्होंने लाठियां निकाली।
लाठीचार्ज शुरू होते ही उपद्रवियों में भगदड़ मच गई। आलम यह रहा कि पुलिसकर्मियों से दो-दो हाथ कर रहे लोग पास स्थित दुकानों में जान बचाने के लिए घुस गए। कई लोगों ने गाड़ियों के नीचे छुपकर जान बचाई। जबकि कुछ लोगों ने यह कहकर बचाव किया कि वे भीड़ में नहीं है बल्कि बाजार आएं हैं। भगदड़ के चलते तमाम लोगों के जूते-चप्पल मौके पर ही छूट गए। सूत्रों का कहना है कि कोतवाली में हमले के पीछे एक जनप्रतिनिधि का हाथ है। पुलिस का भी मानना है कि किसी जनप्रतिनिधि के इशारे पर भीड़ ने कोतवाली में उपद्रव किया है।