नशे और सामाजिक बुराइयों से जंग में पुलिस अब छात्रों को अपने साथ जोड़ेगी। केरल की तर्ज पर उत्तराखंड में भी स्टूडेंट पुलिस कैडेट प्रोजेक्ट लागू करने की कवायद शुरू हो गई है।
छात्रों को हथियार बनाने की कोशिश में पुलिस
यह पहल इसलिए अहम है कि एजूकेशन हब के तौर पर देश में खास पहचान रखने वाले देहरादून में शराब, चरस, स्मैक जैसे नशे का धंधा तेजी से बढ़ा है। धंधेबाज स्कूल, कॉलेजों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को शिकार बनाते हैं।
पुलिस इनके नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश करती तो है, लेकिन धंधेबाज हर बार नशा बेचने का रास्ता तलाश ही लेते हैं। ऐसे में पुलिस अब छात्रों को ही हथियार बनाने की कोशिश में है। नशे में डूबते भविष्य को बचाने की यह कवायद कितनी कारगर रहेगी यह देखना दिलचस्प रहेगा।
यह है केरल का प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट के तहत केरल पुलिस शासकीय और अशासकीय स्कूलों के कक्षा आठ और नौ के छात्रों को विशेष ट्रेनिंग देती है। मकसद किशोरावस्था से ही उनमें सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक करना, खासतौर से नशे से बचाव के तरीके बताना है।
पुलिस छात्रों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी देने, अपराधों से समाज पर असर का अध्ययन कराने के साथ कानूनी जानकारी भी दी जाती है। पर्यावरण और स्वच्छता के साथ अनुशासित जीवन का महत्व भी बेहतर ढंग से बताया जाता है।
केरल के हर स्कूल में हफ्ते में दो दिन यह क्लास लगती है। प्राइवेट स्कूलों के लिए प्रोजेक्ट में फीस जमाकर छात्रों का प्रवेश दिलाने की व्यवस्था की गई है।
नशे की सौदागरों की जड़ें गहरी
उत्तराखंड में खास तौर से देहरादून में नशे की सौदागरों की जड़े काफी गहरी हैं। नशे के मामलों में पकड़े गए तस्करों ने कई बार खुलासा किया है कि वे युवाओं को नशे का आदी बनाने के लिए शुरुआत में उन्हें मुफ्त में चरस, स्मैक, हेरोइन जैसा नशा देते हैं। एक बार लत लग जाने के बाद छात्र एक-एक डोज के लिए हजारों रुपये बहाने के लिए तैयार रहते हैं।
डीआईजी अमित सिन्हा को केरल जाकर प्रोजेक्ट पर मंथन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 13 और 14 नवंबर को सिन्हा केरल में रहकर वहां के अधिकारियों से प्रोजेक्ट पर बात करेंगे। राजधानी में नशे की बढ़ती लत के मद्देनजर यह प्रोजेक्ट काफी मददगार बन सकता है।
- बीएस सिद्धू, डीजीपी