बता दें कि, छात्रों के भविष्य को अहम मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला देते हुए सुभारती मेडिकल कॉलेज को उत्तराखंड सरकार के हवाले कर दिया है। अब यह कॉलेज सरकार चलाएगी। कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स के लिए जरूरी सुविधाएं न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया है।
इसे लेकर छात्रों ने याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया था कि कॉलेज अपना काम सही तरीके से नहीं कर ही है। कॉलेज के पास जरूरी आधारभूत व अन्य सुविधाओं का अभाव है और कॉलेज प्रशासन इन्हें दुरूस्त करने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। कॉलेज में एमबीबीएस के प्रथम वर्ष में 150 छात्रों का दाखिला लिया था।
उन्होंने कहा कि एक वर्ष पढ़ाई होने के बावजूद छात्रों को इसलिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा क्योंकि कॉलेज ने कोर्स के लिए जरूरी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई। इस कारण छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को सुभारती मेडिकल कॉलेज का कार्यभार सौंपा गया है। अब शुक्रवार से कॉलेज में सभी व्यवस्थाओं के सुधार के लिए काम किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत तेजी से काम शुरू कर दिया है।
सुभारती मेडिकल कॉलेज सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बृहस्पतिवार से सरकार के कब्जे में आ गया। इसी के साथ चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी। सबसे पहले व्यवस्था सुधार के तहत राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवीन थपलियाल को सुभारती प्राचार्य पद का कार्यभार सौंपा गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि सुभारती में शुक्रवार से ही सुधार की दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए प्राचार्य की ओर से प्रस्ताव मांगा जाएगा। ताकि जल्द से जल्द कॉलेज को सुचारू किया जा सके।
संबद्धता की प्रक्रिया शुरू की जाएगी
सुभारती मेडिकल कॉलेज में 2017 सत्र के एमबीबीएस दाखिले तो हुए थे लेकिन कॉलेज ने एचएनबी मेडिकल विवि से संबद्धता नहीं ली थी। अब सरकार इस कॉलेज को संबद्धता दिलाने की प्रक्रिया शुरू करेगी।