अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमन साह ने कहा कि लंबा समय बीतने के कारण गवाहों को प्रभावित किया जा रहा है। सुभाष गिरी नाम के एक चश्मदीद गवाह की ट्रेन से फेंककर हत्या की जा चुकी है। अब हमने अपनी बहनों को न्याय दिलाने के लिए यह लड़ाई छेड़ी है।
राज्य सरकार दायित्व निभाने में फेल रही
संघ के महासचिव एडवोकेट एमसी पंत ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार अपना दायित्व निभाने में फेल रही है। हाईकोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने की जगह सरकार ने ज्यूरीडिक्शन उत्तर प्रदेश बताकर अपना पलड़ा झाड़ लिया।
अधिवक्ता सुरक्षा बिल लाने की भी मांग
अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य के अस्तित्व को बचाने और यहां के निवासियों के हितों के संरक्षण व पर्यावरणीय अनुकूल विकास के लिए भू अध्यादेश बनाने, अधिवक्ता सुरक्षा बिल लाने के लिए सरकार व लॉ कमीशन को प्रस्ताव भेजने, अधिवक्ताओं को 5 वर्षों तक प्रतिमाह 15000 रुपये मानदेय देने और इसके लिए आवश्यक फंड जुटाने, अधिवक्ताओं की सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आकस्मिक दुर्घटना के समय निश्चित धनराशि देने का प्रस्ताव भी इस बैठक में लाया जाएगा।
इस दौरान पूर्व सांसद अधिवक्ता डा. महेंद्र सिंह पाल, त्रिभुवन फर्त्याल, भुवनेश जोशी, वीएस नेगी, दुर्गा सिंह मेहता, योगेश पचौलिया, नंदन सिंह कन्याल, किशोर कुमार, वीरेंद्र अधिकारी, प्रभाकर जोशी, डा. दीप जोशी, रविन्द्र सिंह बिष्ट, भूपेंद्र बिष्ट, हेम लोहनी, विशाल मेहरा, एमपी शाह, राकेश नेगी, डीएस नेगी, सुंदर भंडारी, मनोज टिंटगई, एनके पपने आदि मौजूद रहे।