देर रात पुलिस के साध्वी पद्मावती को उठाने के साथ ही अब मातृ सदन आश्रम के ब्रह्मचारी संत आत्मबोधानंद अनशन पर बैठ गए हैं। आत्मबोधानंद इससे पूर्व 9 बार अनशन कर चुके हैं।
पिछली दफा उन्होंने वर्ष 2018 में 194 दिनों तक आमरण अनशन किया था। जब सरकार ने प्रोफेसर जीडी अग्रवाल और ज्ञान स्वरूप सानंद को उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया था तब आत्मबोध आनंद अनशन पर बैठे थे।
उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से साध्वी को जबरन उठाया गया है। पुलिस उन्हें जबरन कुछ खिला-पिला कर अनशन समाप्त कराना चाहती है। वह पहले ही घोषणा कर चुके थे कि साध्वी को उठाने पर वह अपना अनशन शुरू कर देंगे। इसलिए रात में ही उन्होंने गंगा रक्षा के लिए अपना अनशन शुरू कर दिया है।
वहीं, स्वामी शिवानंद भी पुलिस के इस तरह से साध्वी को उठाने पर भड़के हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृसदन के संतों का अनशन मांग पूरी होने न होने तक जारी रहेगा। एक के बाद एक ब्रह्मचारी और साध्वी गंगा रक्षा की मांग को लेकर तपस्या पर बैठते रहेंगे। चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो स्वयं अन्न-जल त्यागकर तपस्या करेंगे।
उन्होंने बताया कि बीती रात से ही साध्वी पदमावती को उल्टियां हो रही थी। इस पर चिकित्सक से कहा तो दिन में उसको दवाइयां दे दी थी। चिकित्सकों ने दोपहर तीन बताया था कि साध्वी पद्मावती को दवाएं दे दी है। अब शुक्रवार को देखेंगे कि उसकी तबीयत कैसी है। लेकिन पुलिस ने शाजिश के तहत देर रात ही साध्वी को उठाकर भर्ती करा दिया।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मैं नैनीताल हाईकोर्ट जाकर अपील करुंगा कि हम किस प्रकार से विरोध करें। वहीं स्वामी दयानंद ने भी कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार खनन माफिया के इशारों पर कार्य कर रही है।