मायूस पुलिस ने एक बार फिर रिमांड मांगी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसी दरमियान रायपुर थाने में दर्ज 2007 के एक मुकदमे में भी उमेश की रिमांड मांगी गई। न्यायालय ने इसे भी सिरे से खारिज कर दिया।
एक नवंबर को उमेश के खिलाफ राजपुर थाने में एक और मुकदमा दर्ज किया गया, मगर पुलिस को हासिल इससे भी कुछ नहीं हुआ। चूंकि मामला ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी का था, लिहाजा इसमें भी रिमांड का कोई आधार न्यायालय ने नहीं माना।
शुक्रवार को जब पुलिस ने जमानत को खारिज करने के जो आधार न्यायालय में रखे उन्हें भी कोर्ट ने मंजूर नहीं किया। अंतत: मुकदमा दर्ज होने के 100वें दिन न्यायालय ने उमेश को जमानत पर रिहा करने के आदेश सुना दिए।