मांगों को लेकर आए दिन तमाम संगठन और लोगों के धरना देने की बात आपने सुनी होगी। कई मौकों पर लोगों को मनाकर पुलिस धरना खत्म भी कराती रही है लेकिन अब पुलिस का दरोगा खुद को न्याय दिलाने की मांग पर धरने पर बैठ गया है।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में बुधवार को गांधी पार्क में उक्त दरोगा धरने पर बैठ गया। दिलचस्प बात यह है कि दरोगा के धरने पर बैठने की भनक पुलिस के खुफिया तंत्र को भी नहीं लग पाई।
कोतवाल, पुलिस और खुफिया अफसरों के एक घंटा खुशामद के बाद दरोगा माना। इसके बाद उसे एसपी के समक्ष पेश किया गया। उन्होंने दरोगा को फिलहाल एक महीने की छुट्टी पर घर भेज दिया है।
अभद्रता की शिकायत पर SP ने किया लाइन हाजिर
रानीखेत में तैनात इस एसएसआई वीसी पांडे को 11 जनवरी को रोडवेज बस दुर्घटना के मृतकों के परिजनों की कथित अभद्रता की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक ने लाइन हाजिर कर दिया था।
इससे वह खफा दरोगा वीसी पांडे बुधवार को दरी लेकर चौघानपाटा जा पहुंचे और करीब 11 बजे वहां सड़क पर धरने पर बैठ गए।
लोगों के समझाने के बाद वह सड़क से उठकर गांधी पार्क में बैठ गए। एसएसआई ने अभद्रता के आरोपों को बेबुनियाद बताया। कहा सड़क दुर्घटना के मृतकों के परिजनों ने उलटे उसके साथ हाथापाई की।
आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, यदि वह दोषी पाया जाए तो उसे बर्खास्त कर दिया जाए।
'उच्चाधिकारी मौके पर आकर मांगे माफी'
दरोगा का कहना था कि लाइन हाजिर होने के बाद उन्होंने अल्मोड़ा आकर उच्चाधिकारियों को वास्तविकता बताकर अपना पक्ष रखना चाहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
कहा कि उच्चाधिकारी मौके पर आकर माफी मांगें तभी वह धरना समाप्त करेगा। दरोगा को धरने पर बैठा देख पार्क में लोगों की भीड़ लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस कर्मी, अधिकारी और खुफिया तंत्र में शामिल कर्मी मौके पर पहुंचे।
करीब एक घंटा खुशामद के बाद वह धरने में बैठे दरोगा को अपने साथ एसपी कार्यालय ले गए। इधर, पुलिस अधीक्षक केएस नगन्याल ने बताया कि अभद्रता संबंधी शिकायत की जांच चल रही है।
दरोगा का धरने पर बैठना गंभीर मामला है। उस पर भी नियमानुसार कार्रवाई होगी। एसपी ने बताया कि फिलहाल दरोगा को एक महीने की छुट्टी पर घर भेज दिया गया है।