मुखानी पुलिस और एसओजी की टीम ने गुसांईपुर से शनिवार की रात कार सवार दो लोगों को भालू की पित्त की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से दो पैकेटों में 332 ग्राम पित्त बरामद की गई। इसे दिल्ली और वहां से विदेश भेजा जाना था। बरामद पित्त की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक करोड़ से अधिक बताई जा रही है।
एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने बहुद्देशीय भवन में पत्रकारों को बताया कि क्षेत्राधिकारी दिनेश चंद्र ढौंडियाल के निर्देशन में मुखानी थानाध्यक्ष कमाल हसन की टीम ने एक सूचना पर वन विभाग के सीओ और उड़न दस्ता के प्रभारी रूप नारायण गौतम के साथ गुसांईपुर में संदिग्ध कार रोककर तलाशी ली।
तलाशी में कार सवार पिथौरागढ़ जिले के जलथ मुनस्यारी निवासी दीपक सिंह रावत के पास 122 ग्राम और दरकोट मुनस्यारी निवासी गणेश धर्मसत्तू के पास से भालू की 210 ग्राम पित्त बरामद की गई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 2/9/39/49/51/52 वन्य जीव जंतु संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। उनकी अल्टो कार (यूके 04 एफ-830) भी जब्त कर ली गई।
दोनों ने बताया कि पित्त को मुनस्यारी से दिल्ली स्थित मजनू का टीला भेजा जाना था। यहां से तस्कर इसे विदेश भेजते हैं। एसपी सिटी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ग्राम पित्त की कीमत 30 से लेकर 50 हजार तक है। बरामद पित्त की कीमत एक करोड़ से अधिक है। पुलिस का कहना है कि अदालत के आदेश पर दोनों को जेल भेज दिया गया है। तस्करों को गिरफ्तार करने वाली टीम में थानाध्यक्ष कमाल हसन, एसआई मनोज पांडे, एसओजी के सत्येंद्र गंगोला, वीरेंद्र रावत, दिनेश शर्मा, कुंदन कठायत, जगपाल शामिल थे।
वन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम ने बताया कि पित्त का एक पैकेट ताजा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक सप्ताह पहले भालू को मारने के बाद उसकी पित्त की थैली निकाली गई है। उन्होंने बताया कि दूसरे पैकेट में रखी पित्त काफी पुरानी है।