हिमालय में कई मूल्यवान और उपयोगी जड़ी-बूटियों का भंडार है, जिसकी बड़े पैमाने पर तस्करी की जा रही है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की टीम ने तस्करी से नेपाल ले जाई जा रही प्रतिबंधित सोन गेरूआ जड़ी को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है।
पकड़ी गई सोन गेरूआ जड़ी की कीमत अंतराष्ट्रीय बाजार में सात लाख से अधिक की बताई जा रही है। वन कर्मियों ने तस्करी में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मंगलवार को केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के धनपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी विजय लाल आर्य, वन वीट अधिकारी पूजा, बुद्घि चौधरी, नागनाथ पोखरी रेंज के वन दारोगा रूपेश कंडारी, प्रकाश कंडारी आदि की संयुक्त टीम ने गौचर-रानौ-पोखरी मोटर मार्ग भटनगर गांव के समीप संदेह के आधार पर एक वाहन की तलाशी ली।
तलाशी के दौरान वन कर्मियों को तीन बोरों में रखी 73 किलोग्राम प्रतिबंधित सोन गेरूआ जड़ी हाथ लगी। वन कर्मियों की टीम ने तस्करी में शामिल राजेंद्र सिंह पुत्र बलवीर सिंह निवासी सुतोल(घाट) और राम बहादुर बोरा पुत्र नरबहादुर बोरा हाल निवासी देहरादून को मौके पर ही दबोच कर हिरासत में ले लिया।
वन कर्मियों द्वारा पूछताछ किए जाने पर आरोपियों ने बताया कि जड़ी को हापला क्षेत्र से एकत्र कर बेचने के लिए नेपाल ले जा रहे थे। नेपाल से यह जड़ी अंतराष्ट्रीय बाजार में बेची जाती है। वन क्षेत्राधिकारी विजय लाल आर्य ने बताया कि दोनों अभियुक्तों के पास अंतराष्ट्रीय तस्कर गिरोह से जुड़े हो सकते हैं।
बरामद की गई जड़ी की कीमत अंतराष्ट्रीय बाजार में सात लाख से ऊपर आंकी जा रही है। बताया कि बांज और अन्य पेड़ों से निकलने वाली सोन गेरूआ जड़ी दवाइयों और मादक पदार्थों के रूप में इस्तेमाल की जाती है। वनक्षेत्राधिकारी ने कहा कि दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है।