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गंगा की दुर्दशा पर NGT सख्त, मांगे जवाब

Tue, 12 Jan 2016 12:53 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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गंगा की सफाई के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने सख्त रुख अख्तियार कर रखा है।
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ट्रिब्युनल इस मामले में रियायत के मूड में बिल्कुल नहीं है। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अगुवाई में पहुंची शासन की टीम से एनजीटी ने दो टूक कहा कि 10 दिसंबर को जारी किए गए आदेशों का अनुपालन किया जाए। इसके साथ ही दिसंबर में पौड़ी में गंगा किनारे लगाए गए कैंपों के संबंध में भी शासन से जवाब तलब किया है। साथ ही18 जनवरी को फिर अपने आदेशों के अनुपालन के संबंध में शासन से रिपोर्ट मांगी है।

एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने सोमवार को उत्तराखंड और यूपी शासन के अफसरों को अपने आदेशों के अनुपालन के संबंध में जानकारी लेने को बुलाया था। एक्शन प्लान को लेकर15 मिनट की सुनवाई के बाद एनजीटी ने प्रदेश शासन को सीधे 10 दिसंबर को जारी आदेशों का अनुपालन करने के संबंध में निर्देश दे दिए।
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मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कुछ निर्देशों के अनुपालन में समयावधि बढ़ाने के लिए कहा था। जिस पर एनजीटी ने लिखित रूप से देने के लिए कहा है। इसके साथ ही कुछ लोगों ने 31 दिसंबर को पौड़ी में गंगा किनारे कैंप लगा दिए थे। एनजीटी को इसकी पहले से जानकारी रही है।

जैसे ही शासन के अफसर पहुंचे, उनसे कैंपों के संबंध में भी जवाब तलब किया गया। कहा गया कि आदेश जारी होने के बाद गंगा किनारे कैंप लगाना एनजीटी की अवमानना के दायरे में आता है। मुख्य सचिव सिंह ने बताया कि इस संबंध में जांच कराई जाएगी कि गंगा किनारे कैंप किसने लगाए थे?
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उन्होंने बताया कि एनजीटी के आदेशों के अनुपालन के मद्देनजर एक्शन प्लान के संबंध में विभिन्न विभागों के साथ बैठकें हो चुकी हैं। 18 जनवरी को ब्यौरा प्रस्तुत कर दिया जाएगा। गंगा में बिना ट्रीट किए सीवरेज डालने वाले आश्रमों, धर्मशालाओं और संस्थान के खिलाफ हुई कार्रवाई का ब्यौरा भी एनजीटी को दिया गया।

एनजीटी के मुख्य आदेश
. आदेशों के अनुपालन और मॉनीटरिंग के लिए प्रदेश स्तर पर कार्यकारी कमेटी का गठन
. गंगा के किनारे दोनों तरफ एक सौ मीटर तक किसी तरह का निर्माण नहीं रहेगा
. जगदीशपुर, हरिद्वार के 40 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट छह महीने के अंदर पूरे किए जाएंगे
. बिना ट्रीटमेंट गंगा में सीवरेज डालने वाले आश्रम, धर्मशाला, संस्थान बंद किए जाएं
. निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाएं तीन महीने के अंदर अपना ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं
. गंगा और इसकी नदियों में किसी भी शहर का ड्रेनेज न डाला जाए, इन्हें बंद किया जाए
. ऐसे ड्रेनेज के लिए ट्रीटमेंट प्लांट और बायो डायजेस्टर लगाया जाए
. बिना अनुमति चल रहे प्रदूषण फैलाने वाले वाले उद्योगों को बंद किया जाए
. गंगा नदी के किनारे बसे शहरों, गांवों, कस्बों में प्लास्टिक आइटम प्रतिबंधित किए जाएं
. उत्तराखंड सरकार पर्यटन स्थल और फ्लड प्लेन का मैप प्रस्तुत करे
. नदियों में जेसीबी से खनन न किया जाए और न ही सेक्शन पंप का इस्तेमाल हो
. किसी भी हाल में बायो मेडिकल कचरा गंगा में न डाला जाए
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