छापामार कर पुलिस ने देहरादून की आसन नदी में अवैध खनन में लगे वाहनों को पकड़ा तो कई सफेदपोश बेचैन हो गए।
खनन माफिया ने जैसे ही छापे की जानकारी अपने आकाओं को दी उनके फोन पुलिस अधिकारियों के पास आने लगे। सबकी एक ही रट थी की उनके गुर्गे के वाहन छोड़ दिए जाएं। लेकिन पुलिस ने ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपनी कार्रवाई को जारी रखा।
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यह आरोप हमेशा ही लगता रहा है कि खनन माफिया के कंधे पर सफेदपोशों का हाथ होता है। उन्हीं शह पर खनन माफिया नदियों का सीना दिन रात चीरते रहते हैं। जब भी पुलिस खनन माफिया की गिरेबान पर हाथ डालती है सफेदपोश सक्रिय हो जाते हैं। उनकी कोशिश होती है कि खनन माफिया को या तो पूरी तरह से बचा लिया जाए।
सफेदपोशों को मुंह की खानी पड़ी
यदि न भी बचे तो पुलिस ऐसी कार्रवाई करे ताकि खनन माफिया को कम नुकसान हो। कई बार पुलिस ऐसे सफेदपोशों के दबाव में आ भी जाती लेकिन कई बार पुलिन इनकी एक नहीं सुनती। गुरुवार की रात भी सफेदपोशों को मुंह की खानी पड़ी। लेकिन पुलिस के अधिकारी से लेकर छोटे कर्मचारी को यह एहसास हो गया कि खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करना आसान काम नहीं है।
एसएसपी केवल खुराना का कहना है कि पुलिस किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। सरकार की तरफ से उन्हें अवैध खनन को रोकने का आदेश मिला है, जिसका पालन हर कीमत पर किया जाएगा।