सोमवार को चौथे दिन भी गांव में एक शव पहुंचा तो विधवा हुई महिला के विलाप से पूरा गांव सिहर उठा। वहीं, सोमवार को सिविल अस्पताल रुड़की में जहरीली शराब से बीमार चार नए लोग भर्ती हुए, जिनकी हालत गंभीर देख उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। वहीं आबकारी विभाग की टीम ने सोमवार को भी बाल्लुपुर और आसपास के कई गांवों में छापेमारी कर अवैध शराब पकड़ी।
जहरीली शराब पीने के कारण बिंडुखड़क निवासी सुशील (38) पुत्र हरचंद की रविवार रात मौत हो गई थी। सोमवार दोपहर बाद एंबुलेंस से शव गांव पहुंचा। एक घंटे के भीतर ही पूरा गांव अंतिम संस्कार में जुट गया। जैसे ही ग्रामीण शव को लेकर श्मशान घाट की ओर बढ़े तो पत्नी पीछे-पीछे विलाप करती हुई दौड़ पड़ी। वहीं, ग्रामीण अस्पताल में भर्ती लोगों को लेकर चिंतित थे।
ग्रामीण विनोद कुमार और चंद्रपाल ने बताया कि हरिद्वार मेट्रो अस्पताल में भर्ती पिंटू, विकास और एम्स में भर्ती संजय की हालत गंभीर है। इसके अलावा सिविल अस्पताल में सोमवार को चार लोग भर्ती हुए थे, जिन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। इनमें बालेंद्र पुत्र तेलूराम, सुक्खा पुत्र रमसा दोनों निवासी मानकपुर आदमपुर झबरेड़ा, सोनू पुत्र प्रमोद और सुंदर पुत्र धीर सिंह निवासी जहाजगढ़ थाना भगवानपुर शामिल हैं।
बिंडुखड़क गांव में रास्ते और कच्चे मकानों की दीवारों में ठूंसी जहरीली शराब की खाली पन्निया अब भी नजर आ रही हैं। जिस हिसाब से घरों के बाहर रास्तों में शराब की खाली पन्नियां पड़ी थीं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां कितनी शराब आती रही होगी।
हर तीसरे घर में सांत्वना देने वालों की लगी रही भीड़
बिंडुखड़क गांव में हर तीसरे घर में सांत्वना देने वालों और रिश्तेदारों की भीड़ दिखाई दे रही है। घरों के बाहर खाट लगाकर उदास बैठे लोग जिला प्रशासन, आबकारी विभाग और झबरेड़ा पुलिस को कोस रहे हैं। किसी ने दामाद खोया तो किसी ने भाई। हर कोई इस घटना स्तब्ध है। भविष्य में ऐसी घटना न घटे, इसके लिए प्रशासन को ठोस उपाय करने की बात कर रहे हैं।
शासन ने जहरीली शराब कांड की जांच के लिए गढ़वाल रेंज के आईजी अजय रौतेला के निर्देशन में एसआईटी गठित कर दी है। टीम में हरिद्वार के एसएसपी, एएसपी और दो थानों प्रभारियों को भी शामिल किया गया है। एसआईटी जांच के बाद शासन को विस्तृत रिपोर्ट देगी।
हरिद्वार जिले में जहरीली शराब के सेवन से अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार सुबह जहरीली शराब कांड सामने आने के बाद एसएसपी जन्मेजय खंडूडी ने जांच के लिए जिले स्तर पर एसआईटी गठित की थी। हरिद्वार और सहारनपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जहरीली शराब बेचने वालाें के चेहरे बेनकाब हो चुके हैं। दोनों जिलों के एसएसपी ने रविवार को बालूपुर निवासी बाप-बेटे को गिरफ्तार कर इस अवैध कारोबार से पर्दा उठा दिया था। झबरेड़ा पुलिस ने सोमवार को वांछित चल रहे सहारनपुर निवासी पिता-पुत्र को भी दबोच लिया। इनसे पूछताछ में कई ओर नाम सामने आए हैं।
इसी बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहरीली शराब कांड की विस्तृत जांच को एसआईटी गठित करने के आदेश दिए। अनुपालन में पुलिस मुख्यालय ने गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय रौतेला के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी है। एसआईटी में हरिद्वार के एसएसपी जन्मेजय खंडूडी, एसपी देहात नवनीत भुल्लर के अलावा भगवानपुर और झबरेड़ा के थाना प्रभारी को शामिल किया गया है। पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कु मार ने बताया कि एसआईटी इस मामले में जांच के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति को टाला जा सके।
‘यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद चेक बांटकर पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम तो लगा दिया, लेकिन उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तो इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी गांव में पैर तक नहीं रखे।’ यह कहना है बिंडुखड़क पहुंचे मृतकों के सहारनपुर निवासी रिश्तेदारों का। उनके साथ-साथ ग्रामीणों में भी सीएम के खिलाफ गुस्सा है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद सीएम गांव में सांत्वना तक देने नहीं पहुंचे। पुलिस और प्रशासन ने भी सुध नहीं ली।
मृतकों के रिश्तेदारों ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि घटना के अगले दिन ही उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की थी। कई मृतकों के परिजनों को चेक भी बांट दिए गए हैं। चेक बांटने का काम अभी जारी है। यहां भी दो दर्जन से अधिक जाने गईं पर सीएम ने मृतकों के परिवारों को सांत्वना तक देना उचित नहीं समझा। यह सुन मृतकों के परिजनों का गुस्सा भी भड़क उठा। वे बोले, गांव में परिवार के परिवार उजड़ गए हैं, लेकिन सीएम ने अभी तक पीड़ितों का हाल तक नहीं जाना। ग्रामीणों ने कहा कि प्रदेश का सीएम परिवार के मुखिया की तरह होता है, लेकिन सीएम त्रिवेंद्र ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई है। जिस दिन घटना हुई, उस दिन तो अधिकारी गांव पहुंचे, लेकिन इसके बाद उन्होंने भी मुंह फेर कर नहीं देखा। ऐसे में वह कैसे विश्वास करें कि सरकार उनके साथ है।