बीते बुधवार और बृहस्पतिवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। सूत्रों की मानें तो रेक्टीफायर एक ऐसा केमिकल है, जिसमें 100 प्रतिशत एल्कोहल होता है।
बताया जाता है कि एक बोतल केमिकल से कच्ची शराब की 20 बोतलें तैयार की जाती है। रेक्टीफायर के रूप में मौत का यह सामान 100 रुपये प्रति बोतल से भी कम में बेचा जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि शराब माफिया जो कच्ची शराब बनाते हैं, उसे और नशीली बनाने के लिए इसका प्रयोग करते हैं।
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि कुछ एजेंट सहारनपुर और मुजफ्फरनगर क्षेत्र में स्थापित शराब की फैक्ट्रियों से रेक्टीफायर को बहुत कम दाम में खरीदते हैं। इसके बाद इन्हें उत्तराखंड के गांवों में सप्लाई किया जाता है।
ग्रामीण बताते हैं कि बाल्लुपुर, भलस्वागाज और बिंडुखड़क गांव में करीब एक हजार लोग रोजाना शराब की लत रखते हैं। जब उनके पास पैसे नहीं होते तो घर में रखे अनाज को लेकर दुकानों पर जाते हैं और इसके बदले कच्ची शराब खरीदकर पीते हैं। बताया जाता है कि इन गांवों में करीब 20 दुकानों पर यह शराब बेची और खरीदी जाती है।
श्मशान में जगह नहीं तो खेत समतल कर किया अंतिम संस्कार
पिछले तीन दिनों में बिंडुखड़क गांव में चिताओं के जलने का सिलसिला जारी है। यहां 11 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बिंडुखड़क गांव के श्मशान में लाशों केे अंतिम संस्कार की जगह नहीं बची है। लिहाजा पास के खेत समतल कर वहां चिंता जलाई जा रही है।
जहरीली शराब मामले में चौतरफा दबाव के बाद सरकार दोषियों पर कठोर कार्रवाई के रास्ते तलाश रही है। इस क्रम में दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या फिर गैंगस्टर एक्ट लगाने तक के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने रविवार को इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में पूरी तरह से गंभीर है। सरकार को हरिद्वार, सहारनपुर और कुशीनगर के तार जुडे़ होने पर साजिश की बू भी आ रही है। इस दिशा में भी जांच की जा रही है। जहरीली शराब के मामले में सरकार की नजर उन फैक्ट्रियों पर भी है, जहां पर मिथाइल एल्कोहल का लेना-देना है। ऐसी फैक्ट्रियों की हरिद्वार में करीब पांच की संख्या है। सरकार इनका स्टाक चेक करा रही है।
आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि जहरीली शराब के प्रकरण में मिथाइल एल्कोहल के प्रयोग की बात भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि आठ जिला स्तरीय अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। इनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो इनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। कई अफसर कर्मचारी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आबकारी एक्ट में कमजोर धाराओं के कारण दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती। इसलिए कठोर कार्रवाई के अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
बाल्लुपुर में तीन साल में शराब के 46 मुकदमे
जहरीली शराब से मौतों के कारण सुर्खियों में आए रुड़की क्षेत्र के बाल्लुपुर में अवैध शराब के कारोबार की मजबूत पृष्ठभूमि रही है। सरकार ने तीन साल में अवैध शराब के मामलों में कार्रवाई के रिकार्ड मंगवाए, तो पता चला कि 46 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत के अनुसार, वर्ष 16-17 में छह, 17-18 में 18 और 18-19 में कुल 22 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें सिर्फ चार में सजा हो पाई।