कामरेड पुरुषोत्तम ने इस टाइप मशीन से उस दौर में दिल्ली संगठन के कई दस्तावेज टाइप किए थे। 90 के बाद तो फिर संगठन के पास नई टाइप मशीन और एक कंप्यूटर भी आ गया था। जमाना भी इलेक्ट्रॉनिक टाइप मशीनों का आ गया था। इसलिए उन्होंने इसे सुरक्षित रख दिया था।
कामरेड पुरुषोत्तम ने कहा कि इस अमूल्य धरोहर को उन्होंने 30 वर्षों से संभाल कर रखा था। उन्होंने भी इसी में टाइप करना सीखा। इसे उचित जगह पहुंचाने के लिए कई मित्रों की राय ली।
अधिकतर मित्रों ने इसे डीएसबी परिसर के संग्रहालय में रखने का सुझाव दिया। इसलिए रविवार को डीएसबी परिसर स्थित संग्रहालय के संचालक बीसी शर्मा और शिक्षक नेता नवेंदु मठपाल इसे लेने बिंदुखत्ता पहुंचे। कहा कि यह हमारी अमूल्य धरोहर है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।