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‘हम चाहते ही नहीं कि मोहब्बत हो जाए’

Tue, 24 Sep 2013 10:11 PM IST
अमर उजाला, पंतनगर
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हिंदी और कविता को बढ़ावा देने के लिए कवियों ने अपनी रचनाओं का ऐसा रस घोला कि कब शाम ढल गई इसका श्रोताओं को पता नहीं चला।
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संस्कार भारती के तत्वावधान में विभिन्न शहरों से आए कवियों ने अपनी शानदार रचनाएं प्रस्तुत कीं। पंतनगर विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का शुभारंभ किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने किया।

मध्यप्रदेश से आए कवि आशुतोष असर ने ‘जब तब फरेबे अक्स उजागर नहीं हुए, हम आइने के कैद से बाहर नहीं हुए सुना लोगों को आनंदित किया।

श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया
काशीपुर के मनोज आर्य ने ‘रहते थे दिन रात सफर में बाबू जी, सिमट गए हैं अब तो घर में बाबू जी’ पर खूब वाहवाही लूटी।

पंतनगर के मोहन मुंतजिर ने ‘हम चाहते ही नहीं कि मोहब्बत हो जाए’ सुनाया। वहीं कासगंज के निर्मल सक्सेना आदि ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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छात्र-छात्राओं के बीच हुई कविता प्रतियोगिता
सौरभ कांत शर्मा ने रामजी का अपमान बाबू का घ्ाटाए मान सुनाई। कार्यक्रम के शुरूआत में स्कूली छात्र-छात्राओं की बीच कविता प्रतियोगिता हुई।

इस मौके पर भाजपा नेता विवेक सक्सेना, राजेन्द्र भट्ट, सर्वेश कुमार राय, शिवेन्द्र विक्रम, गोपाल सिंह बिष्ट, डा. केपी सिंह, डा. श्रीराम और तमाम श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थी सम्मानित किए गए। निबंध प्रतियोगिता में देवेंद्र, आकांक्षा, हसन बेग, आशीष प्रथम रहे।
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