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PM कार्यालय पहुंचा पिटकुल के सर्वे घोटाले का मामला, अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

Sat, 08 Apr 2017 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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श्रीनगर, कोटद्वार होते हुए काशीपुर बिजली की लाइन ले जाने के लिए सर्वे घोटाले का पीएमओ ने संज्ञान ले लिया है। इस घोटाले से भले ही अधिकारियों का घर भर गया हो, लेकिन इन जिलों के रोशनी का रास्ता रुक गया है।
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जब तक यह लाइन नहीं बिछेगी इन जिलों में बिजली नहीं जा पाएगी। पीएमओ के मामले का संज्ञान लेने के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छानबीन तेज कर दी है। गले में फंदा पड़ते देख विद्युत विभाग अब थर्ड पार्टी जांच के लिए कमेटी गठित कर रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को की जाने वाली शिकायतों के पोर्टल पर पिटकुल का फर्जी सर्वे अपलोड हो गया है। इस मामले में सर्वे करने वाली एजेंसी को 56.94 लाख एडवांस पेमेंट किया गया था। इसमें मनी लॉर्डिंग ढूंढने के लिए ईडी ने अपना जाल बिछा दिया है।
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इस मामले में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर विकाश शर्मा फंसे हैं। यह भुगतान ज्योति स्ट्रक्चर्स लिमिटेड को किया गया है। इससे कंपनी के बही-खातों को भी खंगाला जाएगा। इस घोटाले से सबसे बड़ी मुसीबत प्रदेश के लोगों को भुगतनी पड़ेगी। इस लाइन के बिछने में देर होने से 26 जुलाई, 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने श्रीनगर में जिस 400 केवी स्टेशन का उद्घाटन किया है, उसका मकसद खटाई में पड़ जाएगा।
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ऐसे हुई गड़बड़ी


इसी तरह काशीपुर और दूसरी जगहों के स्टेशन ठूंठ बने रहेंगे। वजह यह है कि इन स्टेशनों को इसी लाइन से बिजली जानी है। स्थिति का पूरा ब्यौरा भाजपा नेता मनोज पटवाल ने पीएमओ को भेजा था। इस पर पीएमओ ने संज्ञान लिया है।

इसके बाद से विभागों के हाथ-पैर फूल रहे हैं। शासन अब सर्वे घोटाले की थर्ड पार्टी जांच करा रहा है। पिटकुल के एमडी एसएन वर्मा ने बताया कि कमेटी में यूजीवीएन, यूपीसीएल तथा एक दूसरे विभाग का अधिकारी रहेगा।

श्रीनगर से काशीपुर डबल सर्किट लाइन का सर्वे जीपीएस के माध्यम से बैठक र कर लिया गया। कुल दूरी 152.8 किमी बताई गई। ज्योति स्ट्रक्चर्स ने यह सर्वे कराया। बाद में जब कोबरा कंपनी को जिम्मेदारी मिली तो पता चला कि घने आरक्षित जंगलों, कार्बेट, राजाजी के ऊपर से जीपीएस के आधार पर लाइन रूट बना दिया गया।

कोबरा ने मौके पर जाकर सर्वे किया तो यह दूरी 190 किमी निकली। कंपनी ज्योति को एडवांस भुगतान कर दिया गया। इस वजह से मामला अटका हुआ है। बिजली लाइन न बिछ पाने से इसकी कीमत बढ़ रही है। शुरुआत में आंकलन पांच सौ करोड़ का था, अब यह बढ़कर 1200 करोड़ का बताया जा रहा है। 
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