बताया जाता है कि केंद्रों के आवंटन में फर्जीवाड़े की शिकायत पर विभागीय मंत्री हरक सिंह रावत ने प्रदेश के सभी केंद्रों की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद से केंद्रों का भुगतान लटका हुआ है। ऐसे में केंद्र संचालकों को प्रशिक्षण कोर्स चलाने में दिक्कतें आ रही है।
केंद्र का किराया और प्रशिक्षकों के वेतन भुगतान करने के लिए उधार लेकर किसी तरह से युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। संचालकों का कहना है कि जुलाई माह के बाद नए कोर्स चलाने की अनुमति नहीं मिली है।
इस कारण प्रदेश के अधिकतर सेंटरों के पास वर्तमान में प्रशिक्षण देने के लिए कोई बैच नहीं है। ऐसी स्थिति में केंद्र बंद होने की कगार पर है। एक तरफ सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से 1.20 लाख करोड़ के निवेश पर निवेशकों के साथ एमओयू किया है और निवेशकों को राज्य में उद्योग लगाने पर स्किल्ड मानव श्रम उपलब्ध कराने का दावा किया है। वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षण कार्यक्रम की यह स्थिति सरकारी योजना की हकीकत को बयां करने के लिए काफी है।
कौशल विकास योजना के तहत वर्ष 2020 तक प्रदेश के करीब 50 हजार युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। नवंबर, 2017 के बाद से अब तक उत्तराखंड कौशल विकास मिशन के तहत 13112 युवाओं को ट्रेनिंग के लिए पंजीकरण किया गया। इसमें 9340 को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रमाणपत्र दिया गया। इनमें से मात्र 680 प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी मिल पाई है।
योजना के तहत 52 कोर्स प्रशिक्षण के लिए मान्य है। जॉब कोर्स के हिसाब से प्रदेश के 144 केंद्र पंजीकृत हैं। राष्ट्रीय कौशल विकास प्राधिकरण (एनएसडीसी) की ओर से मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को प्रशिक्षण की अनुमति दी जाती है। राज्य के कुल लक्ष्य के 75 प्रतिशत एनएसडीसी और 25 प्रतिशत उत्तराखंड कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कौशल विकास योजना के तहत केंद्र में वेब डिजाइनर कोर्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार केंद्रों को भुगतान करने में विलंब कर रही है। चार माह से केंद्रों को प्रशिक्षण का भुगतान नहीं हुआ है।
- सत्य चौधरी, निदेशक, धान्या इन्फोमीडिया
प्रदेश के कौशल विकास केंद्रों में समय से भुगतान नहीं हो रहा है और न ही नए कोर्स की अनुमति दी जा रही है। केंद्र का किराया व ट्रेनरों के वेतन भुगतान करने के लिए उधार लेकर कोर्स चलाने पड़ रहे हैं। जिन प्रशिक्षित युवाओं को किताबें व किट दी गई थी। उसका भुगतान भी एक साल से नहीं हुआ है। नए कोर्स की अनुमति न मिलने से देहरादून का केंद्र बंद करना पड़ा।
- मयंक, संचालक, माई प्वाइंट संस्थान
कर्मचारियों के चुनाव ड्यूटी में व्यस्तता के कारण कौशल विकास केंद्रों को दिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का भुगतान करने में विलंब हुआ है। पूर्व में जिन कोर्सों की ट्रेनिंग देने की अनुमति दी गई थी। उन्हें ही पूरा किया जा रहा है। किसी भी सेंटर को नया बैच शुरू करने के लिए अनुमति नहीं दी गई है।
- इकबाल अहमद, निदेशक, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग